Kailash Mansarovar Route: कैलाश मानसरोवर यात्रा ना केवल हिन्दुओं के लिए बल्कि जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी काफी मायने रखती है। ये जानना बेहद जरूरी है कि कैलाश मानसरोवर का बड़ा इलाका चीन के हिस्से में आता है। ऐसे में यहां जाने के लिए चीन की परमिशन लेना आवश्यक है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा अपडेट दिया है। टाइम्स ड्राइव ऑटो समिट एंड अवार्ड्स 2025 में गडकरी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से कैलाश मानसरोवर यात्रा के रूट को लेकर बड़ी जानकारी शेयर की है। दरअसल, पिथौरागढ़ से मानसरोवर के लिए सीधा रास्ता बनाया जा रहा है जिसको लेकर कहा गया है कि इसका निर्माण कार्य 85% पूरा हो चुका है।
इस परियोजना को मौसम संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसपर बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा, 'यह बहुत मुश्किल काम है क्योंकि वहां तापमान शून्य से 8 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। ऐसे में हम कठोर परिस्थितियों के कारण साल में केवल तीन से चार महीने ही काम जारी रख पाते हैं।'
तमाम मुश्किलों और कठिनाइयों के बावजूद गडकरी ने भरोसा दिलाया कि ये परियोजना जल्द ही पूरी हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'मैं कोशिश कर रहा हूं। इस बार अप्रैल के बाद मैं साइट पर भी जाऊंगा। यह जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी।'
इस परियोजना के पूरा हो जाने पर पिथौरागढ़ से मानसरोवर तक सीधा आवागमन हो सकेगा। यह सड़क नेपाल और सिक्किम के मौजूदा मार्गों को बायपास कर देगी। गडकरी ने कहा, 'जब सड़क चीन तक पहुंचेगी, तो हमारा विदेश मंत्रालय उनके साथ चर्चा शुरू करेगा। एक बार यह सड़क बनकर तैयार हो जाए, तो तीर्थयात्रियों को नेपाल या सिक्किम से होकर नहीं जाना पड़ेगा और वे सीधे पिथौरागढ़ के रास्ते कैलाश मानसरोवर पहुंच सकेंगे।'
मालूम हो कि भारतीयों के लिए कैलाश मानसरोवर जाने का एक रास्ता नेपाल की राजधानी काठमांडू से होकर गुजरता है जिसकी दूरी तकरीबन 500 किलोमीटर है। इसके अलावा सिक्किम के नाथुला से इसकी दूरी 802 किलोमीटर है।
