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Explained: रूस से भारत को S-500 और Su-57 का मेगा ऑफर, चीन-पाकिस्तान की टूटेगी चुनौती, जानिए कितनी ताकत?

रूस ने भारत को अपनी दो सबसे घातक और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों — S-500 प्रोमेथियस (S-500 Prometheus) मिसाइल डिफेंस सिस्टम और Su-57 (सुखोई-57) 5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट को बेचने की खुली पेशकश की है। क्या हैं इसके मायने, भारत का क्या रुख होगा?

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क्या हो पाएगी भारत-रूस डील ?
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Sep 2, 2026, 14:19 IST
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगामी भारत दौरे से ठीक पहले मॉस्को ने नई दिल्ली के सामने अपने रक्षा इतिहास का सबसे आक्रामक और बड़ा प्रस्ताव रखा है। बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक के बाद रूस ने भारत को अपनी दो सबसे घातक और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों — S-500 प्रोमेथियस (S-500 Prometheus) मिसाइल डिफेंस सिस्टम और Su-57 (सुखोई-57) 5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट को बेचने की खुली पेशकश की है। रूस की ओर से आया यह बड़ा प्रस्ताव ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है जब भारत धीरे-धीरे रूसी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और फ्रांसीसी व अमेरिकी प्रणालियों के साथ-साथ 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी हथियारों पर जोर दे रहा है। इस प्रस्ताव के क्या मायने हैं, क्या हैं ये हथियार, कितने घातक हैं और चीन-पाकिस्तान जैसे दुश्मनों से सुरक्षा के लिहाज से कितने दमदार हैं, भारतीय सेना की ताकत में कितना इजाफा होगा, इन्हीं सवालों के जवाब विस्तार से जानते हैं।

S-500 प्रोमेथियस: हाइपरसोनिक मिसाइलों का काल

रूस का यह कदम भारत को पहले सौंपे गए S-400 ट्रॉयम्फ (S-400 Triumf) सिस्टम की अपार सफलता का अगला चरण माना जा रहा है। रूस ने भारत को 5 अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन आपूर्ति करने के प्रस्ताव के साथ-साथ अगले स्तर के S-500 की भी पेशकश कर दी है। अद्वितीय मारक क्षमता

S-500 रूस का अगली पीढ़ी का सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) और बैलिस्टिक मिसाइल रोधी प्रणाली है। यह 500 से 600 किलोमीटर की दूरी और अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ रही हाइपरसोनिक मिसाइलों, लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) और स्टील्थ विमानों को पलक झपकते ही नष्ट करने में सक्षम है।

भारत की तकनीकी दुविधा

हालांकि, भारत वर्तमान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के तहत अपने स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुश' (Project Kusha) और द्वि-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) शील्ड को तेजी से विकसित कर रहा है। ऐसे में S-500 की खरीद भारत के अपने स्वदेशी अभियानों पर खर्च होने वाले बजट और प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती है।

चीन और पाकिस्तान की चुनौती का तोड़

Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट चीन और पाकिस्तान की चुनौती का तोड़ साबित हो सकता है। भारतीय वायुसेना (IAF) इस समय फाइटर जेट्स की घटती स्क्वाड्रन संख्या (स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले काफी कम) से जूझ रही है। वहीं, चीन अपने 5th जेनरेशन J-20 स्टील्थ फाइटर जेट्स की संख्या 500 के पार ले जा चुका है और पाकिस्तान भी चीन से J-35 स्टील्थ जेट्स हासिल करने की होड़ में है।

भारत की चुनौतियों को देखते हुए रूस ने Su-57 स्टील्थ फाइटर देने का कार्ड खेला है। रूस ने संकेत दिया है कि अगर भारत इस सौदे पर आगे बढ़ता है, तो वह भारत को पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण, भारत में ही असेंबली और भारतीय प्रणालियों व हथियारों को इसमें एकीकृत करने का अधिकार देगा। भारत का अपना 5th जेनरेशन फाइटर प्रोजेक्ट AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) अभी विकास के चरण में है, जिसके भारतीय वायुसेना में शामिल होने में अभी कुछ वर्षों का समय लगेगा। Su-57 भारत के लिए AMCA के पूरी तरह तैयार होने तक एक बेहतरीन समाधान साबित हो सकता है।

भारत के सामने चुनौतियां

वायुसेना में पहले से ही राफेल, सुखोई-30MKI, मिराज-2000, मिग-29 और तेजस जैसे कई तरह के जेट्स मौजूद हैं। Su-57 को बेड़े में शामिल करने से रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी बढ़ सकता है। दशकों से भारतीय सशस्त्र बलों की रीढ़ रूसी हथियार रहे हैं, चाहे वह Su-30MKI जेट हों, T-90 टैंक हों या परमाणु पनडुब्बियां हों। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत ने फ्रांस से राफेल जेट्स, अमेरिका से MQ-9B प्रेडेटर ड्रोन और अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे हैं।

S-500 Prometheus की खासियतें

S-500 रूस का अगली पीढ़ी का सबसे आधुनिक लॉन्ग-रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) और बैलिस्टिक मिसाइल रोधी सिस्टम है। इसे S-400 के पूरक और उससे भी उन्नत स्तर पर तैयार किया गया है।

  • अभूतपूर्व रेंज और ऊंचाई: यह 500 से 600 किलोमीटर की दूरी और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई तक दुश्मन के लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। यह अंतरिक्ष की निचली कक्षा तक पहुंचने में सक्षम है।
  • हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक खतरों का तोड़: यह प्रणाली 5 से 7 मैक (ध्वनि की गति से 5-7 गुना तेज) की रफ्तार से आने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर तबाह कर सकती है।
  • स्टील्थ और सैटेलाइट ट्रैकिंग: S-500 का मल्टी-फंक्शनल रडार नेटवर्क एक साथ कई स्टील्थ विमानों (जैसे F-35, B-2) और टोही उपग्रहों को ट्रैक कर एक साथ 10 हाइपरसोनिक लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।
  • त्वरित प्रतिक्रिया: इसका रिएक्शन टाइम मात्र 3 से 4 सेकंड है, जो S-400 (9-10 सेकंड) की तुलना में आधा है।

Su-57 (सुखोई-57) 5th जेनरेशन फाइटर जेट की खासियतें

Su-57 रूस का पहला 5th जेनरेशन सिंगल-सीट, ट्विन-इंजन मल्टीरोल स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के हमलों के लिए डिजाइन किया गया है।

  • अदृश्य तकनीक: इसका रडार-एब्जॉर्बिंग मटेरियल (RAM) और विशेष बॉडी डिजाइन इसे दुश्मन के रडार की नजरों से छिपाए रखता है, जिससे यह दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बिना पहचान में आए घुस सकता है।
  • सुपरक्रूज क्षमता: Su-57 बिना आफ्टरबर्नर ऑन किए भी सुपरसोनिक (ध्वनि से तेज) गति से लगातार उड़ सकता है। यह ईंधन की बचत के साथ तेजी से हमला करने में मदद करता है।
  • सुपर-मैन्यूवरेबिलिटी: इसमें लगे 3D थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन इसे हवा में बेहद कठिन और अप्रत्याशित मोड़ों पर मुड़ने की क्षमता देते हैं, जिससे यह डॉगफाइट (हवाई मुठभेड़) में अजेय बनता है।
  • आंतरिक वेपन बे: अपनी स्टील्थ प्रोफाइल को बनाए रखने के लिए यह अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों और सटीक बमों को बॉडी के अंदर बने वेपन बे में ले जाता है।
  • एआई और एडवांस एवियोनिक्स: इसमें 'स्मार्ट स्किन' रडार सिस्टम और एआई-असिस्टेड कॉकपिट दिया गया है, जो पायलट को युद्ध के दौरान वास्तविक समय में सटीक डेटा और निर्णय लेने में मदद करता है।

संतुलन बनाकर भारत को लेना होगा फैसला

रूसी राष्ट्रपति पुतिन की आगामी दिल्ली यात्रा के दौरान यह देखना बेहद अहम होगा कि भारत रूस के इन आकर्षक प्रस्तावों को किस सीमा तक स्वीकार करता है। भारत को अपनी स्वदेशी विकास योजनाओं ('प्रोजेक्ट कुश' और AMCA) तथा अपनी तत्काल उत्तरी सीमाओं यानी चीन सीमा की सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाकर ही कोई अंतिम फैसला लेना होगा। इसके साथ ही चुनौती यह भी है कि भारत हथियारों के मामले में पूरी तरह रूस पर ही निर्भर होकर न रह जाए। इसके अलावा इनकी कीमतें भी एक बड़ा मुद्दा होगा, देखना है कि भारत किस तरह संतुलन साधकर इस सौदे की ओर कदम बढ़ाता है।

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