लाइफस्टाइल

Hardship Camps: मेहनत करने बच्चों को हार्डशिप कैंप क्यों भेज रहे पेरेंट्स, तेजी से बढ़ रहा चलन

बच्चे इन कैम्प्स में वही काम करते हैं जो गांवों में कई लोग रोजी-रोटी के लिए करते हैं, लेकिन इन बच्चों को वही अनुभव लेने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।

Image

जीवन के संघर्ष को समझाने हार्डशिप कैंप क्यों भेज रहे हैं पेरेंट्स? (Photo: iStock)

Hardship Camps: बच्चों को मेहनत की कीमत समझाना और उन्हें जिंदगी की मुश्किलों से रूबरू कराना हर माता-पिता की चिंता होती है। इसी कारण कुछ माता-पिता ने एक ऐसा तरीका चुना है, जो इन दिनों चर्चा में है। वे अपने बच्चों को छुट्टियों में ऐसे कैंप भेज रहे हैं, जहां उन्हें खेतों में काम करना पड़ता है। इन कैंपों को ‘हार्डशिप कैम्प्स' कहा जा रहा है और ये सब हो रहा है चीन में।

इन कैंपों में बच्चे गांव के माहौल में रहते हैं और किसानों की तरह काम करने की कोशिश करते हैं। उन्हें आलू खोदने और बेचने, पेड़ों की छाल निकालने, लकड़ी काटने और सूअरों को चारा देने जैसे काम दिए जाते हैं। कई बार काम इतना थकाने वाला होता है कि बच्चे रोने लगते हैं। इसके बावजूद इन कैंपों की लोकप्रियता बढ़ रही है।

हजारों रुपये देकर सीख रहे हैं मेहनत

इन कैंपों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां बच्चे जो मेहनत वाला काम करते हैं, उनके माता-पिता इसके लिए पैसे देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवार इसके लिए हजारों चीनी युआन खर्च कर रहे हैं, यानी सैकड़ों डॉलर तक की रकम। इन कैंपों का आयोजन मुख्य रूप से चीन के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों, जैसे सिचुआन, गुइझोउ और युन्नान में हो रहा है।

आखिर बच्चों को ऐसी जगह क्यों भेज रहे हैं पेरेंट्स?

इन कैंपों के आयोजकों का कहना है कि उनका मकसद बच्चों को यह समझाना है कि पैसा कमाना और रोजमर्रा की जिंदगी चलाना कितना मेहनत वाला काम है। बच्चों को जब खुद खेत में काम करना पड़ता है, जानवरों की देखभाल करनी होती है या शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है, तो उन्हें अपने माता-पिता की मेहनत का अंदाजा होता है। यानी इसका मकसद सिर्फ बच्चों को मेहनत, जिम्मेदारी और परिवार की अहमियत समझाना है।

लक्जरी कैंप या सच में जिंदगी का सबक?

इन कैंपों को लेकर एक दिलचस्प विरोधाभास भी है। बच्चे वहां वही काम करते हैं जो गांवों में कई लोग रोजी-रोटी के लिए करते हैं, लेकिन इन बच्चों को वही अनुभव लेने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।

सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बच्चों को खेतों और ग्रामीण इलाकों में काम करते देखा जा रहा है। कुछ बच्चों के लिए यह अनुभव नया और मुश्किल है, जबकि कुछ माता-पिता इसे जरूरी जीवन-शिक्षा मान रहे हैं।

यह ट्रेंड एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि क्या बच्चों को मेहनत की कीमत समझाने के लिए उन्हें जानबूझकर मुश्किल परिस्थितियों में डालना जरूरी है? एक तरफ माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे सुविधाओं के बीच बड़े होने के बावजूद संघर्ष और मेहनत को समझें। दूसरी तरफ यह भी सवाल है कि बच्चों को जिम्मेदारी सिखाने और उन्हें मानसिक या शारीरिक रूप से परेशान करने के बीच की सीमा आखिर कहां है।

फिलहाल चीन में ‘हार्डशिप कैम्प्स’ का चलन इसी बहस के बीच तेजी से चर्चा में है। ये कैंप यह जरूर दिखाते हैं कि आज के दौर में माता-पिता अपने बच्चों को सिर्फ किताबों और स्कूल के जरिए नहीं, बल्कि अनुभव के जरिए भी जिंदगी के सबक सिखाना चाहते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article