यात्रा

भारत का मिनी स्विटजरलैंड, प्राकृतिक सौंदर्य से है भरपूर, अंग्रजों की एंट्री है बैन

Chakrata Uttarakhand: पहाड़ों के बारे में सोचते ही सबसे पहले ख्याल उत्तराखंड का आता है। उत्तराखंड के हिल स्टेशन ना केवल भारतीय पर्यटकों को बल्कि विदेशी टूरिस्टों को भी काफी आकर्षित करते हैं। उत्तराखंड के छिपे हुए खजाना चकराता को एक्सप्लोर करने का आप प्लान कर सकते हैं जिसे भारत का मिनी स्विटजरलैंड भी कहते हैं।

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Chakrata Uttarakhand (photo: canva)

Chakrata Uttarakhand: शांत छुट्टी के लिए अगर आप किसी ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो हम आपको उत्तराखंड के छिपे हुए ऐसे खजाने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बार में बेहद कम लोग जानते हैं। इस बार आपकी यात्रा और भी ज्यादा खास होने वाली है। 159 साल पुराने अनोखा हिल स्टेशन चकराता जाने का प्लान कर सकते हैं जिसे भारत का मिनी स्विटजरलैंड भी कहते हैं। चकराता प्राकृतिक सुंदरता और अनोखे नजारों के लिए पर्यटकों का ध्यान खींचता है।

गौर करने वाली बात ये है कि चकराता की यात्रा सिर्फ भारतीय पर्यटक ही कर सकते हैं। विदेशी पर्यटकों की एंट्री यहां पर बैन है। साल 1866 में अंग्रेजों ने चकराता हिल स्टेशन को बसाया था। ईस्ट इंडिया कंपनी के बड़े अधिकारी यहां चिलआउट के लिए आते थे।

इंडियन आर्मी का कैंप चकराता में है ऐसे में सुरक्षा कारणों से यहां विदेशियों की एंट्री बैन की गई है। टाइगर फॉल्स, बुधेर गुफा, देवबन, लाखामंडल मंदिर, राम ताल बागवानी उद्यान और चिलमिरि नेक यहां के प्रमुख आकर्षण है।

मार्च से जून के महीनों के बीच चकराता हिल स्टेशन की यात्रा करना अच्छा होता है। इस दौरान यहां का मौसम सुखद होता है।देहरादून रेलवे स्टेशन चकराता के निकटतम रेलवे स्टेशन है। देहरादून से चकराता की दूरी तकरीबन 87 किलोमीटर है। (नोट- मानसून के दौरान पहाड़ों की यात्रा से पहले मौसम व सड़क स्थिति की जानकारी जरूर लें। अत्यधिक बारिश में यात्रा करने से बचें)

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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