Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक मानी जाती है। इस यात्रा में शामिल होने हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड के इन चार दिव्य धामों की ओर निकलते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल जरूर होता है। इस यात्रा की सही शुरुआत कहां से करें और पूरा रूट क्या है? यदि इस बार आप चारधाम यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो आपको इसका पूरा रूट और सभी स्थानों के बारे में जान लेना चाहिए। इसके अलावा इस यात्रा को सहज और सुगम बनाने के लिए कुछ विकल्पों की जानकारी भी हम आपको देंगे। आइए जानते हैं उत्तराखंड के चारधाम के यात्रा में विस्तार से...
चारधाम यात्रा कब से शुरू होगी
साल 2026 में चारधाम की शुरुआत 19 अप्रैल से होगी। इस यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर से होती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलेंगे। जबकि केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे।
चारधाम यात्रा की शुरुआत कहां से करें?
चारधाम यात्रा की शुरुआत आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से की जाती है। उत्तराखंड के ये दोनों शहर चारधाम यात्रा के मुख्य गेटवे माने जाते हैं, जहां से सड़क मार्ग द्वारा चारों धाम आसानी से कवर किए जा सकते हैं। यदि आप चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं, तो दिल्ली से सीधे हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। जहां से आप यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं।
चारधाम यात्रा का परंपरागत क्रम क्या है?
चारधाम यात्रा क्रम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पश्चिम से पूर्व की दिशा में रखा गया है। इसके लिए क्रमश: यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन करें। इसी क्रम में दर्शन करने से ही चारधाम यात्रा करने का पूरा फल मिलता है। आइए विस्तार से जानते हैं इन चारों धामों के बारे में।
यमुनोत्री धाम
यमुनोत्री चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव है, जो मां यमुना को समर्पित है। यह धाम लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमुनोत्री धाम तक पहुंचने के लिए आपको जानकी चट्टी से करीब 5-6 किमी का ट्रेक तय करना पड़ता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से हमारे पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गंगोत्री धाम
गंगोत्री धाम मां गंगा का पवित्र धाम है, जिसकी ऊंचाई लगभग 3100 मीटर है। यह गंगा नदी का उद्गम स्थान है, जो चारधाम यात्रा का आपका दूसरा पड़ाव होगा। यहां का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक है। गंगोत्री मंदिर के पास से गुजरती भागीरथी नदी और हिमालय की चोटियां इसे और भी दिव्य और भव्य बनाती हैं।
केदारनाथ धाम
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल केदारनाथ मंदिर चारधाम यात्रा का तीसरा पड़ाव है। यह प्राचीन शिव मंदिर एक चढ़ाई के बाद ऊंचाई पर बना है। केदारनाथ मंदिर की यात्रा के लिए गौरीकुंड से करीब 18 किलोमीटर का ट्रेक करना होता है। हालांकि इसके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।
बद्रीनाथ धाम
उत्तराखंड के चारधामों में शामिल बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव है। बद्रीनाथ धाम के दर्शन के बाद ही आपकी चारधाम यात्रा पूर्ण मानी जाती है। बद्रीनाथ में तप्त कुंड प्रमुख आकर्षक का केंद्र है।
