पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में विधानसभा की 68 सीटें हैं। 2017 के विस चुनाव में बीजेपी ने 68 में से 44 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस महज 21 सीटें जीत सकी थी। बीजेपी को इस चुनाव में एक निराशा हाथ लगी जब उसके सीएम पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल अपनी सीट नहीं बचा सके। बात करें इस बार की तो यहां राजनीतिक हालात थोड़े अलग है। कांग्रेस के लिए सबसे अधिक चुनौतियां नजर आ रही हैं। पार्टी के कई दिग्गज नेता पार्टी को अलविदा कर चुके हैं वहीं वीरभद्र सिंह जैसे कद्दावर नेता अब इस दुनिया में नहीं है। हिमाचल प्रदेश का इतिहास रहा है कि यहां तीन दशकों से कोई भी पार्टी अपनी सत्ता बरकरार नहीं रख सकी है, यानि हर पांच साल में बदलाव होता है। भाजपा ने इस मिथक को तोड़ने के लिए अपनी रणनीति को धार देनी शुरू कर दी है और इसी कड़ी में पीएम मोदी राज्य के ताबड़तोड़ दौरे क रहे हैं। बीजेपी लगातार बूथ लेवल रणनीति पर काम कर रही है और घर-घर तक सरकार की उपलब्धियों को कार्यकर्ताओं के जरिए पहुंचाया जा रहा है।
इस बार बीजेपी औऱ कांग्रेस ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी भी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है। मुख्यमंत्री केजरीवाल, भगवंत मान सहित पार्टी के तमाम स्टार नेता राज्य का दौरा कर चुनावी कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं। वहीं बीजेपी चुनाव प्रचार अभियान में भी जहां सबसे आगे दिख रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने अभियान का आगाज तक नहीं कर सकी है। ऐसे में आने वाले समय में कांग्रेस के लिए अपनी अंदरुनी कलह के अलावा बीजेपी से पार पाना भी कम मुश्किल नहीं होगा। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा आज हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में एक रैली के साथ राज्य में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगी।