चंद्र ग्रहण

चंद्रग्रहण एक खगोलीय स्थिति को कहते हैं। ये स्थिति तब बनती है जब चन्द्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। हजारों वर्षों पहले जब लोगों को चंद्र ग्रहण के बारे में जानकारी नहीं थी तब लोग चंद्र ग्रहण की इस घटना को अचंभित होकर देखते थे और इससे डरा करते थे। खासतौर से जब पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता था क्योंकि इस दौरान चंद्रमा खून के रंग का लाल जैसा प्रतीत होने लगा था। हालांकि अब लोगों को इस घटना के बारे में पूरी जानकारी मिल गई है और लोग ग्रहण के प्रति जागरूक भी हो चुके हैं। बता दें चंद्र ग्रहण कुल 3 प्रकार के होते हैं पूर्ण चंद्रग्रहण, आंशिक चंद्रग्रहण और उपच्छाया चंद्रग्रहण। इन तीनों में से पूर्ण चंद्रग्रहण को सबसे ज्यादा विशेष माना जाता है क्योंकि इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूरी तरह से ढक लेती है। ग्रहण के दौरान बहुत से लोग सूतक काल की अवधि का पालन करते हैं। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से ठीक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। ये एक अशुभ अवधि मानी जाती है और इस दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। ऐसे में इस दौरान कई ऐसे नियम और काम बताए गए हैं। बहुत से लोग सूतक काल के दौरान भोजन भी ग्रहण नहीं करते हैं।