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Chandra Grahan 2026: लखनऊ में कब तक दिखेगा चंद्रग्रहण, राजधानी वाले कैसे देख सकते हैं दुर्लभ नजारा

ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले ही सूतक काल लग गया था। जिसके कारण यूपी के सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे और पूजा पाठ पर विराम लग गया था। लखनऊ में स्थित हनुमान सेतु मंदिर के कपाट भी बंद किए गए थे। इसी तरह वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज, सीतापुर समेत यूपी के सभी जिलों के मंदिरों में ग्रहण काल में पूजा-पाठ पर विराम है।

Chandra Grahan 2026

चंद्र ग्रहण 2026

आज साल का पहला चंद्रग्रहण पड़ रहा है। ग्रहण के कारण ही आज होली से जुड़ा कोई भी अनुष्ठान नहीं होगा। यह ग्रस्तोदय चंद्रगहण है, जो पूरे भारत में नहीं बल्कि कुछ हिस्सों में ही दिखेगा। भारत में सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश में चंद्रग्रहण दिखा। वहीं, राजधानी लखनऊ में भी चंद्रग्रहण जारी है। यहां 6.30 से चंद्र ग्रहण जारी है। राजधानी लखनऊ में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित नक्षत्रशाला में टेलिस्कोप से चंद्र ग्रहण दिखाया जा रहा है।

वहीं, ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले ही सूतक काल लग गया था। जिसके कारण यूपी के सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे और पूजा पाठ पर विराम लग गया था। लखनऊ में स्थित हनुमान सेतु मंदिर के कपाट भी बंद किए गए थे। इस मंदिर में रोजाना ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं मंगलवार वाले दिन तो ये संख्या काफी बढ़ जाती है। और आज मंगलवार ही था। मंदिर के गर्भग्रह के कपाट ग्रहण समाप्त होने के बाद ही खोले जाएंगे।

इसी तरह वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज, सीतापुर समेत यूपी के सभी जिलों के मंदिरों में ग्रहण काल में पूजा-पाठ पर विराम है।

आज 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण सूतक काल टाइम

3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से आरंभ होगा। इसका मध्यकाल शाम 5:04 बजे और समापन शाम 6:47 बजे होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूतक काल सुबह लगभग 6:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। यानी सुबह से ही धार्मिक दृष्टि से कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

चंद्र ग्रहण सूतक कब से कब तक रहेगा

आज 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से लगेगा। इसके बाद यह ग्रहण के मोक्ष काल यानी कि आज के चंद्र ग्रहण की समाप्ति तक शाम 6:47 बजे तक जारी रहेगा।

मार्च 2026 को सुबह 6:20 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ सीमित रखें, मूर्तियों को स्पर्श न करें और नए शुभ कार्य शुरू करने से बचें। मानसिक जप, ध्यान और मंत्र स्मरण किया जा सकता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और घर की सफाई करना शुभ माना जाता है। धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य और परिस्थितियों का ध्यान रखना भी जरूरी है। जो लोग व्रत या नियम निभा सकते हैं, वे परंपरा का पालन करें; जो नहीं कर पाते, वे श्रद्धा भाव बनाए रखें।

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शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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