अध्यात्म

Chandra Grahan Ki Katha: चंद्र ग्रहण की पौराणिक कथा, जानें राहु केतु क्यों लगाते हैं चंद्रमा को ग्रहण

Chandra Grahan Katha In Hindi, Chandra Grahan Rahu Ketu Story (चंद्र ग्रहण की कथा, राहु केतु की कहानी क्या है): 3 मार्च, दिन मंगलवार को साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगा है। आज का ये ग्रहण दोपहर में 3:20 PM से लेकर 6:47PM तक रहेगा और भारत में इसका सूतक लगा है। चंद्र ग्रहण लगने के पीछे पौराणिक कथा काफी प्रचलित है। यहां से आप उस कथा को पढ़ सकते हैं।

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चंद्र ग्रहण की कथा (pc: canva)

Chandra Grahan Katha In Hindi, Chandra Grahan Rahu Ketu Story (चंद्र ग्रहण की कथा, राहु केतु की कहानी क्या है): चंद्र ग्रहण की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सारे देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। समुद्र मंथन के दौरान समुद्र में से अमृत और विष दो कलश की प्राप्ति हुई थी। विष का धारण भगवान शिव ने अपने कंठ में किया था। वहीं अमृत पान के लिए देवताओं और दानव में होड़ मची थी।

दानव अमृत का पान करके अमर होना चाहते थे, लेकिन भगवान विष्णु देवताओं को अमर करना चाहते थे। देवताओं को अमृत पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रुप धारण किया। भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखर सारे दानव मंत्र मुग्ध हो गए। मोहिनी रूप में भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिला रहे थे कि तभी राहु नामक दानव देवताओं का रूप धारण करके अमृत पीने के लिए देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। इसकी वजह से मोहिनी ने राहु को देवता समझकर अमृत पिला दिया।

राहु के असली वेश को सूर्य देव और चंद्र देव पहचान गए और उन्होंने भगवान विष्णु से राहु का असली रूप बता दिया। राहु के सच का पता चलते ही विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु की गर्दन काट दी, परंतु अमृत पाने के कारण उसकी मृत्यु नहीं हो पाई और उसका शरीर दो हिस्सों में बंट गया। एक हिस्सा राहु और दूसरा केतु बना ये दोनों ही उपग्रह माने जाते हैं। इस घटना के बाद से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। जिसके कारण पूर्णिमा के दिन राहु चंद्रमा को अपनी छाया से ग्रसित कर देते हैं। जिसके कारण चंद्र ग्रहण लगता है।

चंद्र देव की आरती लिरिक्स (Chandra Dev Ki Aarti Lyrics In Hindi)-

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।

दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।

सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।

प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।

धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।

सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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