Google Vs Indian Startups: गूगल द्वारा प्ले स्टोर से करीब एक दर्जन भारतीय ऐप को डी-लिस्ट करने के मामले में स्टार्टअप फाउंडर्स ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान स्टार्टअप्स ने कारोबार में 40% गिरावट का दावा किया और कहा कि ऐप डी-लिस्टिंग से कारोबार में नुकसान और बिजनेस से बाहर होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि गूगल की नीतियां 'मनमानी और भेदभावपूर्ण' हैं।
बिजनेस में 40% गिरावट का दावा
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टअप्स ग्रुप ने केंद्रीय मंत्री को बिजनेस पर डी-लिस्टिंग के प्रभाव से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि, "गूगल की नीतियां मनमानी और भेदभावपूर्ण हैं और सीसीआई आदेश का उल्लंघन हैं।" स्टार्टअप्स ने अपनी शिकायत में कहा कि वे नए ग्राहक नहीं बना पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कंपनियां घाटे में जा सकती हैं और बिजनेस से बाहर भी हो सकती हैं।
200+ ऐप्स में से केवल 10-15 ऐप्स ही वापस आए
केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में स्टार्टअप्स ने दावा किया गूगल ने 200 से ज्यादा ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर से हटाया है, लेकिन अब तक केवल 10 से 15 को ही वापस लिस्ट किया गया है। स्टार्टअप फाउंडर्स ने सरकार से मदद मांगते हुए गूगल के निर्णय को पलटने और ऐप को फिर से लिस्ट करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि गूगल ने बीते शनिवार को अपनी पेमेंट पॉलिसी का पालन न करने का हवाला देते हुए प्ले स्टोर से ALT बालाजी, नौकरी डॉट कॉम, शादी डॉट कॉम और 99 एकड़ जैसे कई भारतीय ऐप्स को हटा दिया था। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद इनमें से कुछ ऐप को बहाल कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने गूगल की इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और कहा था कि वह सोमवार को स्टार्टअप सदस्यों से मुलाकात करेंगे।
