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स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये एक गलती, आज से ही बदल लें आदत

बहुत सारे लोग अपने फोन की ब्राइटनेस को हाई लेवल पर रखते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपको तुरंत अपनी आदत बदल लेना चाहिए। आपकी यह एक गलती फोन और सेहत दोनों पर ही बुरा असर डाल सकती है।

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स्मार्टफोन में की गई एक गलती आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।

मोबाइल फोन आज के समय में हर किसी की एक बेसिक जरूरत बन चुका है। डेली रूटीन के की सारे घंटे स्मार्टफोन के साथ ही बीतते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हमारी नजरें मोबाइल स्क्रीन पर ही टिकी रहती हैं। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के दौरान अधिकांश लोग एक कॉमन गलती करते हैं जिसका असर फोन की परफॉर्मेंस पर तो पड़ता ही है साथ ही हमारी सेहत पर भी इसका असर पड़ता है। अगर आप एक ऐसे मोबाइल यूजर्स हैं जो दिन में कई घंटे इस्तेमाल करते हैं तो आज की खबर आपके बहुत काम आ सकती है।

दरअसल बहुत सारे लोग अपने फोन की ब्राइटनेस को हाई लेवल पर रखते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आपको तुरंत अपनी आदत बदल लेना चाहिए स्मार्टफोन की स्क्रीन को हर समय फुल ब्राइटनेस पर रखना आपकी सेहत, आंखों और खुद आपके फोन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप अपने फोन की ब्राइटनेस को 100% पर रखते हैं तो आज की खबर में हम आपको इसके नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं।

आंखों की सेहत पर सीधा हमला

आंखे हमारे शरीर के सबसे नाजुक अंगों में से एक है। आंखे लगातार तेज रोशनी को नहीं सहन कर सकते हैं। जब आप 100% ब्राइटनेस पर लंबे समय तक स्क्रीन को रखते हैं तो इससे आपको आंखों में सूखापन (Dry Eyes), जलन, लालिमा और धुंधला दिखाई जैसी समस्या हो सकती है। फुल ब्राइटनेस के कारण हम पलकें झपकाना कम कर देते हैं, जिससे आंखों की नमी खत्म होने लगती है।

लगातार तेज रोशनी के संपर्क में रहने से आंखों के लेंस पर दबाव पड़ता है, जिससे कम उम्र में ही चश्मा लगने की संभावना बढ़ जाती है। आंखों की मांसपेशियों पर लगातार तनाव रहने के कारण माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या आम बात हो जाती है।

'ब्लू लाइट' का ओवरडोज

स्मार्टफोन की स्क्रीन से 'ब्लू लाइट' (Blue Light) निकलती है। जब ब्राइटनेस 100% होती है, तो इस लाइट का असर कई गुना बढ़ जाता है। यह लाइट हमारे शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) नामक हार्मोन के उत्पादन को रोकती है, जो नींद के लिए जिम्मेदार होता है। रात में फुल ब्राइटनेस पर फोन चलाने से नींद गायब हो जाती है, जिससे आगे चलकर थकान और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ सकती है।

स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी ड्रेन होती है

क्या आपका फोन जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है? इसका सबसे बड़ा कारण आपके फोन की बढ़ी हुई ब्राइटनेस भी हो सकती है। स्मार्टफोन का डिस्प्ले सबसे ज्यादा बैटरी की खपत करता है। जब ब्राइटनेस 100% होती है, तो बैटरी दोगुनी तेजी से खत्म होती है। बार-बार फोन चार्ज करने से बैटरी लाइफ साइकिल (Battery Life Cycle) तेजी से घटता है, जिससे कुछ ही महीनों में बैटरी खराब या फूल जाती है।

'स्क्रीन बर्न-इन' का खतरा

यदि आपके पास AMOLED या OLED डिस्प्ले वाला प्रीमियम स्मार्टफोन है, तो फुल ब्राइटनेस आपके फोन के डिस्प्ले को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकती है। लगातार 100% ब्राइटनेस पर रहने से स्क्रीन के पिक्सल ओवरहीट हो जाते हैं। इससे स्क्रीन पर एक धब्बा या किसी ऐप के आइकन की परछाई जैसा हमेशा दिखने लगता है जिसे'स्क्रीन बर्न-इन' या 'घोस्ट इमेज' कहा जाता है। इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आपको आप ब्राइटनेस को कम रखें।

फोन का अत्यधिक गर्म होना

जब आप स्मार्टफोन की ब्राइटनेस को बढ़ाते हैं तो इससे प्रोसेसर और डिस्प्ले पर अधिक जोर पड़ता है। इसकी वजह से फोन तेजी से गर्म होता है। अगर आप लगातार हाई ब्राइटनेस रखते हैं तो इससे स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस भी धीमी हो सकती है और यह हैंग भी कर सकता है।
Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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