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स्मार्टफोन में ‘संचार साथी’ का प्री-इंस्टॉलेशन जरूरी नहीं, 10 गुना बढ़ गई यूजर्स की संख्या

दूरसंचार विभाग ने एक बयान में कहा, ‘उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ऐप इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया को तेज करने और कम जागरूक नागरिकों तक ऐप को आसानी से पहुंचाने के लिए दिया गया था।’

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संचार साथी ऐप के प्री इंस्टालेशन के आदेश को सरकार ने लिया वापस। (फोटो क्रेडिट-Digit)

सरकार ने स्मार्टफोन में साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी’ को पहले से अनिवार्य रूप से लगाने के आदेश को वापस ले लिया है। दूरसंचार विभाग ने बुधवार को कहा कि वह संचार साथी ऐप को ‘इंस्टॉल’ करने के अनिवार्य आदेश को हटा रहा है। इसका कारण यह है कि सिर्फ एक दिन में स्वैच्छिक रूप से इस ऐप के डाउनलोड में 10 गुना वृद्धि हुई है।

दूरसंचार विभाग ने एक बयान में कहा, ‘उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ऐप इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया को तेज करने और कम जागरूक नागरिकों तक ऐप को आसानी से पहुंचाने के लिए दिया गया था।’

10 गुना बढ़ गई यूजर्स की संख्या

बयान के अनुसार, ‘सिर्फ पिछले एक दिन में, छह लाख नागरिकों ने ऐप डाउनलोड करने के लिए पंजीकरण कराया है। यह इसके उपयोग में 10 गुना वृद्धि है। संचार साथी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, सरकार ने मोबाइल विनिर्माताओं के लिए इसे पहले से ‘इंस्टॉल’ करना अनिवार्य नहीं करने का फैसला किया है।’

साइबर अपराध से निपटने में करता है मदद

सरकार के अनुसार Sanchar Saathi App बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नकली या फिर डुप्लिकेट IMEI नंबरों से पैदा होने वाले टेलीकॉम साइबर खतरों से निपटने में मदद करता है। फर्जी IMEI का इस्तेमाल धोखाधड़ी और नेटवर्क के गलत उपयोग के लिए किया जाता है। IMEI (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) हर मोबाइल फोन को दिया जाने वाला 14 से 17 अंकों का एक विशेष पहचान नंबर होता है। इसी नंबर की मदद से चोरी हुए फोन का नेटवर्क एक्सेस बंद किया जा सकता है।

90 दिन की मिली थी टाइम लिमिट

दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर के आदेश में, स्मार्टफोन विनिर्माताओं को सभी नए मोबाइल फोन में ऐप को पहले से लगाने और पुराने मोबाइल फोन में इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इंस्टाल करने के निर्देश दिए थे। सरकार की तरफ से मोबाइल फोन्स निर्माता कंपनियों को अगले 90 दिनों के अंदर इसका पालन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ ही कंपनियों को 120 दिन के अंदर मंत्रालय को रिपोर्ट देने को भी कहा गया था इस आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी नेताओं ने इससे जासूसी की चिंता जताई। उनका कहना है कि यह ऐप कॉल सुन सकता है और संदेशों की निगरानी कर सकता है।

(इनपुट-भाषा)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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