चीन इन दिनों ह्यूमनॉइड रोबोट्स को लेकर जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वहां रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों में सामान उठाते या इंसानों की मदद करते नजर नहीं आ रहे, बल्कि अब उन्हें दौड़ने, फुटबॉल खेलने, टेबल टेनिस, डांस और यहां तक कि बॉक्सिंग जैसी गतिविधियों के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। अगस्त 2026 में बीजिंग में आयोजित World Humanoid Robot Games ने इस तकनीकी दौड़ को एक नया चेहरा दिया है। इस आयोजन में 2,056 ह्यूमनॉइड रोबोट और 666 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
रोबोट्स का अनोखा गेम शो
22 से 26 अगस्त तक बीजिंग के National Speed Skating Oval यानी ‘Ice Ribbon’ में हो रहे इस आयोजन में रोबोट्स को अलग-अलग खेलों में अपनी क्षमता दिखाने का मौका दिया जा रहा है। इस बार प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाकर 51 कर दी गई है, जिसमें 30 प्रतिस्पर्धी और 21 वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित इवेंट शामिल हैं। 16 देशों से टीमें पहुंची हैं, हालांकि इनमें चीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
इस गेम शो में रोबोट्स 100 मीटर दौड़, फुटबॉल, जिम्नास्टिक्स, डांस, वुशू, टेबल टेनिस और किकबॉक्सिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। 24 अगस्त को सामने आए दृश्यों में ह्यूमनॉइड रोबोट्स को रनिंग रेस और किकबॉक्सिंग में प्रतिस्पर्धा करते देखा गया।
दौड़ में रोबोट ने बनाया रिकॉर्ड
इस आयोजन का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा रोबोट्स की रेस रही। चीन में विकसित Tiangong Ultra ह्यूमनॉइड रोबोट ने 100 मीटर की दौड़ सिर्फ 9.39 सेकंड में पूरी करने का दावा किया है। यह समय इंसानों के 100 मीटर के मौजूदा विश्व रिकॉर्ड 9.58 सेकंड से भी तेज है, जो उसैन बोल्ट ने 2009 में बनाया था,
हालांकि रोबोट और इंसानों की दौड़ की तुलना तकनीकी रूप से सीधे करना उचित नहीं है, क्योंकि दोनों की शारीरिक संरचना और प्रतिस्पर्धी परिस्थितियां अलग हैं। यह उपलब्धि इस बात का संकेत जरूर है कि चीन रोबोट्स की बैलेंसिंग, मोटर कंट्रोल, सेंसर और रियल टाइम निर्णय क्षमता को बेहतर बनाने पर काफी काम कर रहा है।
बॉक्सिंग और किकबॉक्सिंग क्यों जरूरी है?
रोबोट को दौड़ाना अपेक्षाकृत नियंत्रित परिस्थिति में संभव है, लेकिन बॉक्सिंग या किकबॉक्सिंग जैसी गतिविधियां कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। इसमें रोबोट को तेजी से सामने वाले की गतिविधि पहचाननी होती है, अपना संतुलन बनाए रखना होता है और उसी समय प्रतिक्रिया भी देनी होती है।
यही वजह है कि रोबोट्स को ऐसी गतिविधियों में उतारना केवल मनोरंजन नहीं माना जा सकता। इससे डेवलपर्स को यह समझने में मदद मिलती है कि मशीन अचानक बदलती परिस्थितियों, टक्कर और तेज मूवमेंट के दौरान कितनी स्थिर रहती है। हालांकि मौजूदा रोबोट अभी इंसानों जैसी सहजता और समझ हासिल नहीं कर पाए हैं।
असली मकसद खेल नहीं, इंडस्ट्री है
चीन के इस रोबोट गेम्स का उद्देश्य सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं है। आयोजन में कई ऐसे इवेंट भी रखे गए हैं, जिनका सीधा संबंध वास्तविक दुनिया के कामों से है। इनमें घरेलू काम, फायरफाइटिंग, रिटेल और फैक्ट्री से जुड़े कार्य शामिल हैं।
इस साल प्रतियोगिताओं को वास्तविक वातावरण के और करीब ले जाने की कोशिश की गई है। कुछ परिदृश्यों में रोबोट्स को फैक्ट्री, होटल और मॉडल होम जैसे वातावरण में लंबे समय तक काम पूरा करना है। इसका मकसद रोबोट को केवल डेमो दिखाने वाली मशीन के बजाय वास्तविक काम करने वाले सहायक के रूप में विकसित करना है।
क्या चीन रोबोट्स की सेना तैयार कर रहा है?
यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि चीन रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। लेकिन केवल रोबोट्स को दौड़ाने या बॉक्सिंग सिखाने के आधार पर यह कहना कि चीन ‘रोबोट सेना’ तैयार कर रहा है, फिलहाल सही नहीं होगा।
इन प्रतियोगिताओं में मुख्य जोर ऑटोनॉमी, मूवमेंट, सेंसर, AI निर्णय क्षमता और व्यावहारिक काम पर है। उदाहरण के लिए, इस साल 100 मीटर रेस को पूरी तरह स्वायत्त रोबोट्स के लिए रखा गया है। कई अन्य प्रतियोगिताओं में भी रिमोट कंट्रोल पर निर्भरता कम करने की कोशिश की गई है।
ROBOT CHINA
हालांकि, यही तकनीक भविष्य में सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल की जा सकती है। तेज दौड़ने, बाधाओं के बीच चलने, संतुलन बनाए रखने और अपने आसपास के वातावरण को समझने वाली मशीनें सैन्य या आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती हैं। लेकिन मौजूदा सार्वजनिक जानकारी से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इन गेम्स का मुख्य उद्देश्य सैन्य रोबोट तैयार करना है।
चीन की रणनीति क्या है?
दरअसल चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स को एक रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्र के तौर पर विकसित कर रहा है। देश में Unitree, UBTECH और कई अन्य कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोट्स पर काम कर रही हैं। हाल के वर्षों में निवेश, रिसर्च और बड़े पैमाने पर उत्पादन की कोशिशों में भी तेजी आई है। Reuters के मुताबिक Unitree जैसी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है और चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट कंपनियां उत्पादन और व्यावसायिक इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
इसलिए इन खेलों को चीन की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है—जहां प्रतियोगिता के जरिए रोबोट की क्षमता को मापा जाता है, कमजोरियों का पता लगाया जाता है और फिर उसी तकनीक को उद्योग, लॉजिस्टिक्स, सर्विस, हेल्थकेयर और अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है।
आगे क्या होगा?
चीन का रोबोट गेम्स मॉडल यह दिखाता है कि आने वाले वर्षों में ह्यूमनॉइड रोबोट केवल तकनीकी प्रदर्शन का हिस्सा नहीं रहेंगे। अगर कंपनियां इन मशीनों को सुरक्षित, भरोसेमंद और कम लागत में बड़े पैमाने पर बनाने में सफल होती हैं, तो फैक्ट्रियों, गोदामों, होटलों और घरों में इनका इस्तेमाल बढ़ सकता है।
जहां तक ‘रोबोट सेना’ की बात है, फिलहाल इसे लेकर कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यह जरूर स्पष्ट है कि चीन ऐसे रोबोट विकसित करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है जो इंसानों की तरह चल सकें, काम कर सकें और बदलती परिस्थितियों में खुद निर्णय ले सकें। यही क्षमता भविष्य में रोबोटिक्स की सबसे बड़ी ताकत बनने वाली है।
