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अंतरिक्ष से iPhone 17 Pro Max शूट करेगा वीडियो, NASA ने आईफोन को ही क्यों दी मंजूरी?

iPhone 17 Pro Max: स्मार्टफोन का इस्तेमाल अब अंतरिक्ष में संभव हो गया है और इसका तमगा सबसे पहले Apple को मिला है, क्योंकि Nasa ने पहली बार अंतरिक्ष में किसी स्मार्टफोन के इस्तेमाल की मंजूरी दी है।

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अब अंतरिक्ष से iPhone 17 Pro Max शूट करेगा वीडियो, NASA ने पहली बार स्मार्टफोन को दी मंजूरी

आईफोन अब सिर्फ धरती पर इस्तेमाल होने वाला स्मार्टफोन नहीं रह गया है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि iPhone 17 Pro Max अब चांद पर भी पहुंच गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का Artemis 2 मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है। करीब 50 साल बाद पहली बार इंसानों को डीप स्पेस में भेजा जा रहा है और यह 21वीं सदी का पहला क्रू्ड चंद्र मिशन भी है, लेकिन इस मिशन की एक और खास बात है कि इसमें पहली बार किसी iPhone को इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

अंतरिक्ष में iPhone 17 Pro Max का इस्तेमाल

Orion स्पेसक्राफ्ट में मौजूद हर एस्ट्रोनॉट के पास iPhone 17 Pro Max है, जिसका इस्तेमाल वे फोटो और वीडियो कैप्चर करने के लिए कर रहे हैं। ये तस्वीरें न सिर्फ उनके परिवारों के लिए हैं, बल्कि दुनिया को भी अंतरिक्ष के नजारे दिखाने के लिए साझा की जा रही हैं। नासा की वेबसाइट पर इस मिशन की जो भी तस्वीरें पोस्ट हो रही हैं वो आईफोन 17 प्रो मैक्स से ही क्लिक की जा रही हैं।

NASA ने कैसे दी मंजूरी?

आमतौर पर NASA स्पेस मिशन में प्रोफेशनल कैमरे या GoPro जैसे डिवाइस ही इस्तेमाल करने की अनुमति देता है, लेकिन इस बार iPhone को भी क्लियर किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, किसी भी नए हार्डवेयर को मिशन में शामिल करने से पहले NASA एक लंबी और सख्त जांच प्रक्रिया अपनाता है।

नासा ने आईफोन को ही क्यों दी मंजूरी?

NASA के Artemis II मिशन में iPhone 17 Pro Max का इस्तेमाल लोगों के लिए चौंकाने वाला था। सवाल उठता है कि इतने हाई-टेक स्पेस मिशन में एक “साधारण” स्मार्टफोन क्यों चुना गया? दरअसल, इसके पीछे कई तकनीकी और व्यावहारिक कारण हैं।

1. हाई-क्वालिटी कैमरा और वीडियो क्षमता

सबसे बड़ा कारण इसका कैमरा है। iPhone 17 Pro Max में बेहद एडवांस कैमरा सिस्टम है, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम है। Artemis-2 के दौरान जो शानदार तस्वीरें सामने आईं, उनमें से कुछ इसी फोन से ली गई थीं। अंतरिक्ष में iPhone का इस्तेमाल सामान्य फोन की तरह नहीं होता। इसमें इंटरनेट, ब्लूटूथ जैसी सुविधाएं बंद रहती हैं और इसे मुख्यतः फोटो और वीडियो कैप्चर करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।

2. छोटा लेकिन पावरफुल डिवाइस

NASA को ऐसे डिवाइस चाहिए होते हैं जो हल्के, छोटे और मल्टीफंक्शनल हों। iPhone एक ही डिवाइस में कैमरा, कंप्यूटर और रिकॉर्डिंग टूल का काम कर सकता है। इसकी कंप्यूटिंग पावर और सेंसर इसे रिसर्च और डॉक्यूमेंटेशन के लिए उपयोगी बनाते हैं।

3. कठोर टेस्टिंग के बाद मिला “ग्रीन सिग्नल”

NASA किसी भी उपकरण को अंतरिक्ष में भेजने से पहले कड़ी जांच करता है। iPhone 17 Pro Max को भी जीरो ग्रैविटी, रेडिएशन और तापमान जैसी परिस्थितियों में टेस्ट किया गया। यहां तक कि यह भी देखा गया कि अगर इसका ग्लास टूटे तो क्या खतरा हो सकता है। इन सभी टेस्ट में पास होने के बाद ही इसे मिशन में शामिल किया गया।

4 चरणों में होती है जांच

NASA की इस मंजूरी प्रक्रिया में चार चरण होते हैं। सबसे पहले डिवाइस को सेफ्टी पैनल के सामने पेश किया जाता है। फिर संभावित खतरों की पहचान की जाती है। इसके बाद उन खतरों से निपटने की योजना बनाई जाती है। अंत में उस योजना की व्यवहारिकता को साबित किया जाता है। इन सभी चरणों से गुजरने के बाद ही किसी डिवाइस को स्पेस मिशन के लिए मंजूरी मिलती है।

NASA: iPhone 17 Pro Max

NASA: iPhone 17 Pro Max

Apple की भूमिका नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, Apple ने इस प्रक्रिया में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है, हालांकि कंपनी का कहना है कि यह पहली बार है जब iPhone को पृथ्वी की कक्षा और डीप स्पेस दोनों में इस्तेमाल के लिए पूरी तरह योग्य माना गया है।

NASA लगातार Orion स्पेसक्राफ्ट से ली गई तस्वीरें साझा कर रहा है, जिनमें पृथ्वी और चंद्रमा के नजारे शामिल हैं। खास बात यह है कि ये सभी तस्वीरें iPhone 17 Pro Max से ली गई हैं, जो इस मिशन को और भी खास बना देती हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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