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ऑनलाइन कंटेंट ब्लॉक करने की समय सीमा में हो सकती है कटौती, 1 घंटे की टाइमिंग पर विचार कर रही सरकार

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  • Updated Mar 24, 2026, 06:21 PM IST

फरवरी में आईटी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में बड़े बदलाव किए थे। इन बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने के लिए पहले के 24-36 घंटे की जगह सिर्फ 2-3 घंटे दिए जाएंगे।

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सरकार की तरफ से हाल ही में आईटी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया था।(फोटो क्रेडिट-iStock)

पिछले महीने सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अवैध और फेक कंटेंट को 2-3 घंटे के अंदर हटाने का निर्देश दिया था। अब जल्द ही सरकार की तरफ से इस पर एक बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सरकार इस 2-3 घंटे की अवधि को घटाने पर विचार कर रही है और इसे 1 घंटे किया जा सकता है। इससे यह समझा जा सकता है कि सरकार सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामाग्री को तेजी से हटाना चाहती है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्च पर बताया कि यह मामला शुरुआती चरण में हैं, सरकार इस पर विचार कर रही है कि इसे आगे बढ़ाया जाए या नहीं। अधिकारी के मुताबिक, 'यह फैसला काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सोशल मीडिया कंपनियां हाल ही में लागू 2-3 घंटे की समयसीमा का कितना सही तरीके से पालन कर रही हैं। तभी तय होगा कि समयसीमा को घटाकर 1 घंटा किया जाए या नहीं।'

फरवरी में आईटी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में बड़े बदलाव किए थे। इन बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने के लिए पहले के 24-36 घंटे की जगह सिर्फ 2-3 घंटे दिए जाएंगे। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह समय सीमा दुनिया में किसी भी सरकार द्वारा तय की गई सबसे कम समय सीमा है।

केंद्र सरकार दे सकती है इजाजत

पिछले हफ्ते खबर आई थी कि केंद्र सरकार जल्द ही गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी सोशल मीडिया पर कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार दे सकती है। अभी यह अधिकार सिर्फ आईटी मंत्रालय के पास है। अगर ऐसा होता है, तो यह दिखाता है कि भारत में ऑनलाइन कंटेंट को नियंत्रित करने का दायरा बढ़ रहा है।

यह सिर्फ एक तरीका है जिससे सरकार सोशल मीडिया पर कंटेंट को रोकने के लिए सख्ती बढ़ा रही है। इसके अलावा सरकार “अश्लील” कंटेंट की नई परिभाषा बनाकर और चीजों को प्रतिबंधित करने की योजना भी बना रही है। साथ ही, आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत कंटेंट ब्लॉक करने की प्रक्रिया को भी बढ़ाने की बात हो रही है, जिसे गृह मंत्रालय के ‘सहयोग’ पोर्टल के जरिए संभाला जाता है।

अवैध कंटेंट पर कार्रवाई करती है सरकार

हालांकि सरकार का कहना है कि वह केवल अवैध सामग्री पर कार्रवाई करती है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ता यह बता रहे हैं कि उनके कई पोस्ट, जो सरकार के प्रति व्यंग्यात्मक या आलोचनात्मक थे और जरूरी नहीं कि अवैध हों, प्रभावित हुए हैं क्योंकि कंपनियाँ बढ़ते नियामक दबाव के सामने अपने अनुपालन ढांचे को मजबूत कर रही हैं।

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