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Fintech Startup: तीन साल में भारत में फिनटेक स्टार्टअप की संख्या पांच गुना बढ़ी, बन गए 26 यूनीकॉर्न

Fintech Startup: वित्त वर्ष 23 में फिनटेक स्टार्टअप की अनुमानित आय 20 अरब डॉलर के आसपास थी। यह देश में मौजूद सभी बैंक, फाइनेंसियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) कंपनियों की कुल आय का 5 प्रतिशत था।

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फिनटेक स्टार्टअप

Fintech Startup: देश में फिनटेक यूनिकॉर्न की संख्या 26 तक पहुंच गई है। इनकी संयुक्त मार्केट वैल्यू 90 अरब डॉलर से भी ज्यादा है। जेएम फाइनेंसियल की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले तीन वर्षों में भारत में फिनटेक स्टार्टअप की संख्या पांच गुना बढ़कर 10,200 (2024) हो गई है। वित्त वर्ष 23 में इन सभी कंपनियों की अनुमानित आय 20 अरब डॉलर के आसपास थी। यह देश में मौजूद सभी बैंक, फाइनेंसियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) कंपनियों की कुल आय का 5 प्रतिशत था। भारत में फिनटेक स्टार्टअप में मर्चेंट पेमेंट्स, वॉलेट्स, कंज्यूमर पेमेंट्स, लोन, इंश्योरेंस और वेल्थ मैनेजमेंट को शामिल किया जाता है।

एक ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़े

वहीं, 2021 में यह आंकड़ा 2,100 था। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में एक डेकाकॉर्न फिनटेक (10 अरब डॉलर से अधिक की वैल्यूएशन) है। वहीं, 25 यूनिकॉर्न हैं, जिनकी वैल्यूएशन एक अरब डॉलर से लेकर 10 अरब डॉलर के बीच है। 37 मिनिकॉर्न हैं, जिनकी वैल्यूएशन 100 मिलियन डॉलर से लेकर 1 अरब डॉलर है।इसके अलावा देश में 87 सूनीकॉर्न फिनटेक स्टार्टअप हैं, जिनकी वैल्यूएशन 60 मिलियन से लेकर 100 मिलियन डॉलर के बीच है।रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की सभी फिनटेक कंपनियों की अनुमानित संयुक्त वैल्यू 125 अरब डॉलर के करीब है।

28 अरब डॉलर जुटाए

वित्त वर्ष 23 में इन सभी कंपनियों की अनुमानित आय 20 अरब डॉलर के आसपास थी। यह देश में मौजूद सभी बैंक, फाइनेंसियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) कंपनियों की कुल आय का 5 प्रतिशत था।रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की फिनटेक इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा फंडिंग पेमेंट और लैंडिंग कंपनियों को मिल रही है। फिनटेक इंडस्ट्री द्वारा जुटाई गई कुल फंडिंग का 85 प्रतिशत इन्हीं कंपनियों द्वारा जुटाया गया है।2014 से 2023 के बीच भारतीय फिनटेक स्टार्टअप्स ने 1,486 डील में कुल 28 अरब डॉलर जुटाए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में खपत बढ़ने, वित्तीय सेवाओं के लोगों तक पहुंचने और एआई के कारण 2030 तक फिनटेक यूनिकॉर्न की संख्या 150 तक और इनकी आय 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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