दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले दिनों हिंडवेयर लिमिटेड की ओर से शुरू किए गए ट्रेडमार्क विवाद में एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने टेक दिग्गज गूगल (Google) की नींद उड़ा दी है। कोर्ट ने 163 पन्नों के अपने एक बेहद कड़े फैसले में साफ कहा है कि गूगल दूसरों के ट्रेडमार्क को उनके प्रतिद्वंद्वियों को बेचकर "फ्री-राइडिंग" (दूसरों की साख पर मुफ्त की सवारी) कर रहा है। यानी गूगल वह चीज बेचने की कोशिश कर रहा है जिसका वह मालिक ही नहीं है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा विवाद और कैसे कोर्ट का फैसला भारत में डिजिटल विज्ञापन की दुनिया में बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है?
गूगल के साथ हिंडवेयर का विवाद किस बारे में था?
2013 की शुरुआत में, सैनिटरीवेयर प्रोडक्ट्स का कारोबार करने वाली कंपनी 'हिंडवेयर लिमिटेड' को पता चला कि उसकी प्रतिस्पर्धी सैनिटरीवेयर कंपनियों - 'ग्रोहे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और 'सेरा सैनिटरीवेयर लिमिटेड' ने गूगल के एडवर्ड्स प्रोग्राम के जरिए 'हिंडवेयर' ट्रेडमार्क को कीवर्ड के तौर पर खरीदा था। नतीजा यह हुआ कि जब भी कोई ग्राहक गूगल सर्च इंजन पर 'हिंडवेयर' शब्द सर्च करता, तो सबसे पहला नतीजा 'सेरा' की वेबसाइट का आता था। साथ ही, जब कोई 'हिंडवेयर सैनिटरी' या 'हिंडवेयर सैनिटरीवेयर' सर्च करता, तो पहला नतीजा 'ग्रोहे' की वेबसाइट का आता था।
हिंडवेयर ने तर्क दिया कि गूगल उसके रजिस्टर्ड और मशहूर ट्रेडमार्क का इस्तेमाल विज्ञापन बनाने के लिए प्रतिस्पर्धियों या किसी अन्य कंपनी को इसे ऑफर या सजेस्ट करके कर रहा है। हिंडवेयर का कहना था कि ऐसा उनकी पूर्व सहमति या मंजूरी के बिना किया जा रहा था। इसके बाद, सेरा और ग्रोहे ने हिंडवेयर के साथ समझौता कर लिया, जिससे गूगल इंडिया और गूगल एलएलसी के खिलाफ मुख्य कानूनी लड़ाई जारी रही।
कीवर्ड एडवरटाइजिंग असल में क्या है?
Google 'Google AdWords' नाम का एक प्रोग्राम चलाता है। यह कीवर्ड एडवरटाइजिंग का ही एक रूप है, जो एडवरटाइजर्स को अपने सर्च इंजन www.google.com पर सर्च रिजल्ट के साथ विज्ञापन दिखाने की सुविधा देता है। Google AdWords के तहत, एडवरटाइजर्स 'कीवर्ड' कहे जाने वाले शब्दों या वाक्यांशों के लिए बोली लगाते हैं। जब कोई यूजर Google Search में ये शब्द डालता है, तो ये कीवर्ड एक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन को ट्रिगर या जेनरेट करते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर कोई खास तौर पर LG या Panasonic के बारे में सर्च करता है, तो कोई दूसरी कंपनी Google को फीस देकर 'LG' या 'Panasonic' कीवर्ड खरीद सकती है। इससे यूजर को ऑर्गेनिक रिजल्ट (यानी LG या Panasonic की वेबसाइट) के बजाय विज्ञापन खरीदने वाली कंपनी का विज्ञापन या वेबसाइट दिखाई देगी।
विवाद से पूरा नाता
भाषा सीखने वाली कंपनी Rosetta Stone ने Google पर आरोप लगाया था कि वह उसके ट्रेडमार्क नाम को प्रतिस्पर्धियों को विज्ञापन के लिए बेच रहा है। कंपनी का कहना था कि Google कीवर्ड विज्ञापन के जरिये दूसरे विज्ञापनदाताओं को "Rosetta Stone" नाम इस्तेमाल करने की सुविधा दे रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है। यह मामला अमेरिकी अदालत तक पहुंचा और Google की ट्रेडमार्क कीवर्ड नीति पर दुनिया के सबसे चर्चित मुकदमों में से एक बन गया। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
ब्रिटेन की फूल डिलीवरी कंपनी Interflora ने आरोप लगाया कि रिटेल कंपनी Marks & Spencer ने Google Ads में "Interflora" शब्द खरीदकर अपने विज्ञापन दिखाए। अदालत ने माना कि केवल ट्रेडमार्क कीवर्ड खरीदना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या विज्ञापन देखकर उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है कि दोनों कंपनियों के बीच कोई व्यावसायिक संबंध है।
हिंडवेयर ने आपत्ति क्यों दर्ज कराई थी?
हिंडवेयर का दावा था कि 'HINDWARE' एक रजिस्टर्ड और जाना-माना ट्रेडमार्क है, जिसकी साख (गुडविल) दशकों में बनी है। कंपनी का तर्क था कि विज्ञापनों को दिखाने के लिए कीवर्ड के तौर पर उसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करना, ट्रेड मार्क्स एक्ट की धारा 29(6) के तहत "विज्ञापन में" ट्रेडमार्क के इस्तेमाल जैसा ही है। उसने तर्क दिया कि अगर कोई ग्राहक खास तौर पर 'Hindware' शब्द सर्च करता है, तो यह साफ है कि वह खास तौर पर उनके ही प्रोडक्ट ढूंढ रहा है। अगर ग्राहक को किसी दूसरी कंपनी का सर्च रिजल्ट पहले दिखता है, तो इससे कन्फ्यूजन पैदा होगा और संभावित ग्राहक दूसरी कंपनियों (राइवल ब्रांड्स) की ओर चले जाएंगे।
2009 तक, गूगल भारत में कीवर्ड के तौर पर ट्रेडमार्क के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता था, लेकिन 2009 के बाद यह पॉलिसी बदल दी गई। कंपनी ने कहा कि भारत में लागू पॉलिसी, यूरोपियन यूनियन (EU) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के देशों के लिए गूगल की पॉलिसी से अलग है।
गूगल का बचाव क्या था?
गूगल ने कहा कि कीवर्ड, यूजर की सर्च क्वेरी के जवाब में विज्ञापन दिखाने के लिए बैकएंड ट्रिगर का काम करते हैं। क्योंकि यूजर विज्ञापन देने वाले के दिए गए कीवर्ड नहीं देख सकते, इसलिए ट्रेडमार्क का कीवर्ड के तौर पर इस्तेमाल करना ट्रेडमार्क एक्ट के तहत 'इस्तेमाल' नहीं कहा जा सकता। जब कई विज्ञापन देने वाले एक ही शब्द को कीवर्ड के तौर पर चुनना चाहते हैं, जिसमें ट्रेडमार्क वाला शब्द भी शामिल है, तो गूगल ट्रेडमार्क वाले शब्द पर ऑक्शन या बोली लगाता है और रेवेन्यू के तौर पर कॉस्ट-पर-क्लिक रकम कमाता है।
यूजर्स के बीच कन्फ्यूजन के सवाल पर, गूगल ने कहा कि इनऑर्गेनिक या स्पॉन्सर्ड सर्च रिजल्ट्स को ऑर्गेनिक सर्च रिजल्ट्स से अलग दिखाने के लिए 'ad' प्रीफिक्स के साथ लेबल किया जाता है, जिससे यूजर्स के बीच कन्फ्यूजन की संभावना खत्म हो जाती है।
कोर्ट का यह फैसला क्यों अहम है?
यह मामला ट्रेडमार्क कानून और डिजिटल विज्ञापन मॉडल के बीच बढ़ते ग्लोबल टकराव से जुड़ा है। सर्च इंजन की कमाई कीवर्ड विज्ञापन सिस्टम से होती है। रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क को प्रतिद्वंद्वियों को नीलाम करके, Google ट्रेडमार्क के मालिक के कई प्रतिस्पर्धियों से कमाई करता है। कोर्ट ने हिंडवेयर के पक्ष में फैसला सुनाते हुए Google को विज्ञापन कीवर्ड के तौर पर 'हिंडवेयर' नाम या उससे जुड़े शब्दों के किसी भी कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करने से रोक दिया।
कोर्ट ने माना कि Google का व्यवहार "फ्री-राइडिंग" (बिना मेहनत के फ़ायदा उठाना) जैसा है, क्योंकि यह ट्रेडमार्क मालिक द्वारा सालों से किए गए निवेश से पैसे कमाता है। कोर्ट ने कहा कि तीसरे पक्षों को ट्रेडमार्क का सुझाव देकर, उन्हें बढ़ावा देकर और उनकी नीलामी करके, Google ट्रेडमार्क की अच्छी साख (गुडविल) का फायदा उठाता है। वह अपनी AdWords पॉलिसी में ज्यादा लोगों को शामिल करने और ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए, ग्राहकों को आकर्षित करने की ट्रेडमार्क की ताकत को दूसरे प्रतिस्पर्धियों को बेच देता है। "ऐसा करके, Google ने कुछ ऐसा बेचने की कोशिश की है जिसका वह मालिक ही नहीं है।"
इस मामले के अलावा, यह फैसला क्यों अहम है?
इस फैसले का असर भारत में ऑनलाइन विज्ञापन से जुड़े ट्रेडमार्क विवादों पर पड़ सकता है। इससे यह तय हो सकता है कि कंपनियां ऑनलाइन विज्ञापनों और सर्च रिजल्ट में अपने प्रतिस्पर्धियों के ब्रांड नामों का इस्तेमाल कितनी आजादी से कर सकती हैं। इस फैसले के बाद गूगल ने बयान जारी कर कहा कि हम सभी स्थानीय कानूनों का पूरा सम्मान करते हैं और उनके मुताबिक काम करते हैं। जिन मामलों में आदेश बहुत ज्यादा व्यापक होते हैं या हमारी नीतियों के अनुरूप नहीं होते, वहां हम देश की कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखते हैं।
गूगल ने आगे कहा, "खासकर ट्रेडमार्क कीवर्ड से जुड़ी हमारी विज्ञापन नीति के बारे में बताएं तो, हमारी एक स्पष्ट नीति है जिसके तहत किसी प्रतिस्पर्धी विज्ञापनदाता को विज्ञापन के टेक्स्ट में ट्रेडमार्क वाले शब्दों का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। यह नीति दुनिया भर में एक समान रूप से लागू की जाती है और भारतीय ट्रेडमार्क कानून के अनुरूप है।"
कंपनी का कहना है कि ट्रेडमार्क कीवर्ड का तथाकथित 'बैकएंड' इस्तेमाल जायज है, ताकि छोटी कंपनियां पहले से स्थापित बड़ी कंपनियों से मुकाबला कर सकें। कंपनी ने कहा कि इसीलिए वह विज्ञापनों के असल टेक्स्ट में प्रतिस्पर्धी ट्रेडमार्क कीवर्ड के भ्रामक इस्तेमाल पर तो रोक लगाती है, लेकिन बिडिंग (बोली लगाने) की प्रक्रिया में ऐसा नहीं करती।
