Auto Taxi Strike: दिल्ली और एनसीआर में आज (शुक्रवार) को 15 ऑटो और टैक्सी यूनियन के ड्राइवर्स हड़ताल पर है। ऑटो-टैक्सी ड्राइवर्स, राइड-हेलिंग सर्विस ओला और उबर के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल कर रहे हैं। यानी यह हड़ताल कल भी जारी रहने वाली है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि ऑटो-टैक्सी चालक उबर और ओला से नाराज हैं, लेकिन रैपिडो से नहीं।
क्या है पूरा मामला?
यह हड़ताल ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों तथा ओला और उबर जैसी थर्ड पार्टी ऐप-आधारित सर्विस के बीच चल रहे संघर्ष का हिस्सा है। ड्राइवर इन कंपनियों की भारी कमीशन रेट की आलोचना कर रहे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कई ओला-उबर ड्राइवर का दावा है कि ओला और उबर दोनों ही कंपनियां कार के रखरखाव और ईंधन लागत को छोड़कर बहुत अधिक कमीशन लेती हैं। जिससे ड्राइवर को बहुत कम पैसे मिलते हैं।
क्या है हड़ताल की असली वजह?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के ओला उबर ऑटो चालक शंकर कहते हैं कि 200 रुपये की सवारी के लिए मुझे केवल 110 या 100 रुपये मिलते हैं। करीब 20 साल से ऑटो चला रहे शंकर चार साल पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चले गए, लेकिन उन्हें इन कंपनियों के साथ कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।
क्या है ऑटो-टैक्सी ड्राइवर्स की मांग?
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा कहते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन निजी ओला और उबर बाइक टैक्सी चालकों पर लगे अनैतिक कामों के आरोपों और शराब, नशीले पदार्थ और तस्करी के धंधों में संलिप्तता के कारण हो रहा है।
वर्मा ने कहा, "हम कई सालों से ओला और उबर जैसी कंपनियों के बारे में सरकारों और विभागों को लिख रहे हैं, लेकिन कोई नहीं सुनता। ये कंपनियां अपना पक्ष रखती हैं और सरकार अपना पक्ष रखती है, लेकिन यह सब चंदे का खेल है, जिसमें सरकार भी शामिल है। हम इस खेल को खत्म करने की मांग करते हैं।"
Rapido क्यों हुआ नजरअंदाज
दिसंबर 2023 में रैपिडो ने ओला और उबर की तरह अपनी ‘रैपिडो कैब्स’ सर्विस शुरू की। हर सवारी पर कमीशन चार्ज करने के बजाय रैपिडो ने सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल पेश किया। फरवरी 2024 में इस मॉडल में ऑटो राइड्स को भी शामिल किया गया। ऐसे में इससे ड्राइवरों को इतनी परेशानी नहीं हो रही है।
