Airtel Denies Data Breach: टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने अपने ग्राहकों से जुड़ी जानकारी में सेंध की खबर को शुक्रवार को खारिज कर दिया। उसने कहा कि इस तरह का दावा ब्रांड की छवि को खराब करने का एक हताश प्रयास है। एयरटेल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब डार्क वेब पर ‘एक्सईएनजेडईएन’ नाम के एक अकाउंट पर दावा किया गया था कि उसके पास एयरटेल इंडिया के 37.5 करोड़ से अधिक ग्राहकों के लेटेस्ट डेटा का एक्सेस है।
कंपनी ने डेटा ब्रीच से किया इनकार
एयरटेल ने डेटा ब्रीच के दावों को खारिज कर दिया है। दूरसंचार कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘एक रिपोर्ट में एयरटेल के ग्राहकों से जुड़ी जानकारी में सेंध का आरोप लगाया गया है। यह निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा एयरटेल की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का एक हताश प्रयास है। हमने गहन जांच की और हम पुष्टि कर सकते हैं कि एयरटेल में ग्राहकों से जुड़े डेटा में कोई सेंध नहीं लगी है।’’
क्या डार्क वेब पर बिक रहा Airtel यूजर्स का डेटा
बता दें कि एयरटेल यूजर्स के डेटा को डार्क वेब पर लीक करने का दावा किया गया था। ‘एक्सईएनजेडईएन’ नाम के एक अकाउंट पर दावा किया गया था कि उसके पास एयरटेल इंडिया के 37.5 करोड़ से अधिक ग्राहकों का लेटेस्ट डेटा का एक्सेस है। इस डेटा में यूजर्स का फोन नंबर, ईमेल एड्रेस, माता-पिता का नाम तथा आधार कार्ड सहित सरकारी पहचान पत्र शामिल हैं। इस डेटा को डार्क वेब पर बिक्री के लिए रखा गया है।
एयरटेल के सूत्रों ने बताया, ‘‘इसका मूल दावा करने वाले को लोगों के साथ ठगी के कारण ‘हैकिंग फोरम’ से प्रतिबंधित कर दिया गया है।’’ यानी एयरटेल का कहना है कि एक्सईएनजेडईएन का डेटा ब्रीच का दावा एकदम फर्जी है।
बीचफोरम पोस्ट के अनुसार, इन डेटा की हुई चोरी
- मोबाइल नंबर
- नाम
- जन्मतिथि
- पिता का नाम
- पते
- ईमेल आईडी
- लिंग और राष्ट्रीयता
- आधार संख्या
- फोटो पहचान प्रमाण विवरण
- पता प्रमाण विवरण
डेटा लीक से ऐसे रहें सावधान
चाहे आप एयरटेल के यूजर्स हों या नहीं - भारतीय कंपनियों से संबंधित डेटा पहले भी लीक या हैक किया जा चुका है। और चाहे आप इससे प्रभावित हुए हों या नहीं, कुछ साइबर-सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।
- पासवर्ड अक्सर बदलें: संक्रमित ईमेल एड्रेस से जुड़े सभी ऑनलाइन अकाउंट के पासवर्ड अपडेट करें।
- अकाउंट की निगरानी करें: किसी भी अनधिकृत लेनदेन के लिए बैंक और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट की नियमित जांच करें।
- टू फेक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) इनेबल करें: ऑनलाइन अकाउंट में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ें।
- फिशिंग प्रयासों से सावधान रहें: संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या वेरिफाइड सोर्स को व्यक्तिगत जानकारी प्रदान करने से बचें।
