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न्यूयॉर्क के स्कूलों में AI पर लगा बैन, मेयर बोले- बच्चों को चाहिए इंसानी जुड़ाव

स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इन्सेर्म (Inserm) और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुरके शोधकर्ताओं के अध्ययन में कम उम्र में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों में कमजोर याददाश्त और कम शैक्षणिक प्रदर्शन की आशंका जताई गई है।

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ChatGPT जैसे AI चैटबॉट भी होंगे बैन

न्यूयॉर्क सिटी ने पब्लिक स्कूलों में छात्रों के लिए Generative AI के इस्तेमाल को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मेयर ज़ोहरान ममदानी ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के दौरान 2-K से लेकर 8वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्टूडेंट फेसिंग जेनरेटिव AI टूल्स पर एक साल की रोक लगाने का ऐलान किया है। अमेरिका के सबसे बड़े स्कूल डिस्ट्रिक्ट में लागू होने वाली इस नीति का असर करीब 6 लाख पब्लिक स्कूल छात्रों पर पड़ेगा।

बच्चों को AI नहीं, इंसानी जुड़ाव की जरूरत: मेयर

मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि बच्चों को सीखने और विकसित होने के लिए शिक्षकों और मानवीय जुड़ाव की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, छात्रों को अपने साथियों के साथ मिलकर स्किल विकसित करनी चाहिए, शिक्षकों के साथ रिश्ते बनाने चाहिए और मुश्किल समस्याओं को खुद हल करने की कोशिश करनी चाहिए।

ममदानी ने AI आधारित शुरुआती शिक्षा की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टेक इंडस्ट्री लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि AI आधारित शुरुआती शिक्षा न केवल तय है, बल्कि जरूरी भी है, लेकिन न्यूयॉर्क सिटी इसे इस नजरिए से नहीं देखती।

ChatGPT जैसे AI चैटबॉट भी होंगे बैन

नई नीति के तहत 2-K से 8वीं कक्षा तक छात्रों के लिए ऐसे सॉफ्टवेयर पर रोक होगी, जिनमें स्टूडेंट फेसिंग जेनरेटिव AI फीचर मौजूद हैं। इसमें AI ट्यूटर और अन्य AI आधारित लर्निंग टूल्स शामिल हैं। 2-K अमेरिका में करीब दो साल की उम्र के बच्चों के लिए Kindergarten से पहले का प्रोग्राम है।

प्रशासन के मुताबिक, 38 से ज्यादा ऐसे पहले से स्वीकृत प्रोग्राम्स के AI फीचर्स को बंद या हटा दिया जाएगा, जो नई सुरक्षा और निगरानी संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करते। इसके अलावा ChatGPT और Claude जैसे AI चैटबॉट्स के साथ-साथ ‘companion chatbots’ पर भी रोक रहेगी।

हाई स्कूल छात्रों को सीमित AI एक्सपोजर

हालांकि, न्यूयॉर्क सिटी ने AI पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है। हाई स्कूल के छात्रों को सीमित तरीके से AI का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। करीब 50 हजार छात्र पांच सीमित AI पायलट प्रोग्राम्स में शामिल हो सकेंगे। हर हाई स्कूल में अधिकतम पांच कक्षाओं में इनका इस्तेमाल किया जाएगा और प्रशिक्षित शिक्षक सीधे इसकी निगरानी करेंगे।

इन पायलट प्रोग्राम्स में केवल ऐसे AI टूल्स का इस्तेमाल होगा, जिन्हें सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी मानकों के आधार पर मंजूरी दी गई हो। इसके अलावा सभी हाई स्कूल छात्रों को हर साल AI से जुड़े दो 45 मिनट के AI literacy या क्रिटिकल थिंकिंग मॉड्यूल भी दिए जाएंगे। इनमें छात्रों को AI की क्षमताओं और सीमाओं, पक्षपात, जोखिम, नैतिक सवाल, करियर और भविष्य की स्किल्स के बारे में बताया जाएगा।

शिक्षकों को मिलेगी सीमित छूट

शिक्षकों को पढ़ाई की योजना बनाने और प्रशासनिक कामों के लिए AI का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए संबंधित टूल्स को न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल्स के सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होगा। हालांकि, शिक्षक AI का इस्तेमाल छात्रों की ग्रेडिंग या असेसमेंट के लिए नहीं कर सकेंगे। वहीं, दिव्यांग छात्रों के लिए असिस्टिव टेक्नोलॉजी, अंग्रेजी सीखने वाले छात्रों और कंप्यूटर साइंस जैसे करियर रीडनेस प्रोग्राम्स के लिए कुछ अपवाद भी रखे गए हैं।

स्कूलों में स्क्रीन टाइम भी होगा सीमित

AI बैन के साथ न्यूयॉर्क सिटी ने छात्रों के स्क्रीन टाइम को लेकर भी नए नियम लागू करने की घोषणा की है। दूसरी कक्षा और उससे नीचे के छात्रों के लिए व्यक्तिगत डिवाइस पर one-to-one स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाएगा। तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए रोजाना 30 मिनट और छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए 45 मिनट का स्क्रीन टाइम कैप सुझाया गया है।

AI के बढ़ते इस्तेमाल पर क्यों उठ रहे सवाल?

शहर का यह फैसला ऐसे समय आया है जब शिक्षा में AI के प्रभाव को लेकर बहस तेज है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि AI छात्रों को होमवर्क तेजी से पूरा करने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में करीब छह महीने AI इस्तेमाल करने के बाद छात्रों के होमवर्क स्कोर में 18 फीसदी सुधार देखा गया, जबकि बंद किताब वाली मासिक परीक्षाओं में उनके स्कोर 20 फीसदी कम हो गए।

स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। इन्सेर्म (Inserm) और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुरके शोधकर्ताओं के अध्ययन में कम उम्र में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों में कमजोर याददाश्त और कम शैक्षणिक प्रदर्शन की आशंका जताई गई है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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