Hamida Banu: आज अलीगढ़ को भले ही रिंकू सिंह के नाम से जाना जाता है, लेकिन ये वो शहर है जिसने 1900 के दशक में भारत को पहली महिला पहलवान दिया जिसने पूरे विश्व में भारत के नाम का डंका बजवाया, नाम हमीदा बानो जिनका जन्म 1900 के दशक में उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में एक पहलवान परिवार में हुआ था। पिता को बचपपन से पहलवानी करते देखा तो मन बना लिया कि वो भी लड़ेंगी। आज गूगल इस महिला धाकड़ पहलवान को सेलिब्रेट कर रहा है।
हमीदा ने जीते 300 से ज्यादा प्रतियोगिता
हमीदा बानो के बारे में कहा जाता है कि वह कोई भी खेल चुनती तो उसमें अव्वल होती, लेकिन रेसलिंग जैसे खेल में महिला का आना और इस तरह से डॉमिनेट करना अपने आप में एक रोमांच कर देने वाला किस्सा है। बानो ने अपने पूरे करियर में 300 से ज्यादा गेम जीते।
पुरुष पहलवानों को देती थीं चुनौती
हमीदा बानो की पहलवानी का स्तर इस बात से समझा जा सकता था कि वह पुरुष पहलवानों को भी खुली चुनौती देती थीँ। पुरुष पहलवान भी उनके दमखम से परिचित थे, तभी वह मुकाबला करने से सौ बार सोचते थे। एक बार तो उन्होंने छोटे गामा को भी लड़ने की चुनौती दी थी, लेकिन उन्होंने हार की डर से अपना नाम वापस ले लिया।
4 मई, 1954 को रचा इतिहास
हमीदा बानो ने अपनी रेसलिंग का लोहा 4 मई 1954 को मनवाया जब उन्होंने उस वक्त के मशहूर पुरुष पहलवान को पटखनी दी। यह कुश्ती का वह मैच था जिसने हमीदा को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। खेल प्रेमियों के लिए भी यह किसी ट्रीट से कम नहीं था क्योंकि उन्हें एक महिला और पुरुष पहलवान का मुकाबला देखने को मिलने वाला था। इस मुकाबले में उम्मीद के विपरीत हुआ और हमीदा ने नामी बाबा पहलवान को हराया वो भी केवल 1 मिनट और 34 सेकेंड में, इस कुश्ती ने उन्हें पूरी दुनिया में लोकप्रिय बना दिया।
