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EXPLAINER: 24 साल से सच हो रही थी 'जापान कर्स' की कहानी, इंग्लैंड ने तोड़ा रहस्यमयी सिलसिला

फीफा वर्ल्ड कप में जब पहली बार 'जापान कर्स' का संयोग बना तो लोगों ने नजरअंदाज कर दिया। दूसरी बार हुआ तो इस पर चर्चा शुरू हो गई। तीसरी बार जब जापान कर्स लागू हुआ तो फैंस हैरान रह गए और चौथी बार भी जब संयोग बना तो इसे कहानी का रूप दे दिया। फुटबॉल फैंस जापान कर्स पर विश्वास करने लगे, लेकिन 24 साल बाद इस अभिशाप को इंग्लैंड ने तोड़ दिया। आइए जानते हैं क्या है 'जापान कर्स?' और क्या है इसकी थ्योरी।

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टूट गया जापान कर्स का तिलिस्म। फोटो- AI

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। 24 साल से फुटबॉल वर्ल्ड कप में एक अजीब संयोग बार-बार दोहराया जा रहा था। वह यह कि जापान नॉकआउट स्टेज में हारता था, जो टीम जापान को हराती थी वह टीम आगे बढ़ती थी, लेकिन ट्रॉफी कोई तीसरी टीम जीत लेती थी। 2026 वर्ल्ड कप में लाखों फैंस को लगा कि यह रहस्यमयी सिलसिला फिर सच होने वाला है, लेकिन इंग्लैंड ने पूरी कहानी ही बदल दी और फीफा में जापान के अभिशाप के तिलिस्म को तोड़ दिया।

फीफा वर्ल्ड कप में जब एक बार संयोग हुआ तो लोगों ने नजरअंदाज कर दिया। दूसरी बार हुआ तो चर्चा शुरू हुई। तीसरी बार हुआ तो फैंस हैरान रह गए और जब चौथी बार भी बिल्कुल वैसा ही हुआ, तब सोशल मीडिया ने इसे नाम दे दिया, 'जापान कर्स' यानी जापान का अभिशाप। साल 2026 में भी जापान ने नॉकआउट स्टेज में जगह बनाई और राउंड ऑफ 32 में ब्राजील से हार गया। कुछ दिनों बाद नॉर्वे ने राउंड-16 में ब्राजील को चौंकाते हुए हरा दिया। बस यहीं से सोशल मीडिया पर फिर से बवाल मच गया। लाखों फैंस दावा करने लगे कि इस बार ट्रॉफी नॉर्वे ही उठाएगा। वजह थी, जापान कर्स का अगला पड़ाव अब नॉर्वे बन चुका था, लेकिन यहीं पर वो हुआ, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

भारतीय समयानुसार, 12 जुलाई को इंग्लैंड ने क्वार्टर फाइनल में नॉर्वे को 2-1 से हराया और 24 साल से चली आ रही इस दिलचस्प थ्योरी के तिलिस्म को तोड़ दिया। इंग्लैंड ने जापान कर्स को खत्म कर दिया। हालांकि, फुटबॉल फैंस अब भी मजाक में पूछ रहे हैं, क्या अभिशाप खत्म हुआ है या फिर उसने नया ठिकाना ढूंढ़ लिया है?

क्या है 'जापान कर्स'

फीफा वर्ल्ड के पिछले चार एडिशन में फुटबॉल फैंस ने एक अनोखा पैटर्न नोटिस किया। उन्होंने पाया कि जब भी जापान फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट में पहुंचता है और किसी टीम से हारता है तो वह टीम वर्ल्ड कप से बाहर हो जाती है। उसकी जगह उसे हारने वाली टीम विश्व चैंपियन बनती है। आसान भाषा में समझें तो जापान जब भी फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज में हारा और उस टीम को जिसने हराया अंत में वही टीम चैंपियन बनी।

कैसे शुरू हुई कहानी?

इसकी शुरुआत साल 2002 में हुई। तब राउंड ऑफ-16 में जापान को तुर्किये ने हराया। इसके बाद तुर्किये, ब्राजील से हार गया और अंत में ब्राजील विश्व चैंपियन बना। जब यह पहली बार हुआ तो इसे महज संयोग माना गया। दूसरी बार साल 2010 में भी यह पैटर्न देखने को मिला। जापान नॉकआउट में पहुंचा और पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे से हार गया। बाद में पैराग्वे को स्पेन ने हराया और स्पिन ने ट्रॉफी जीती ली।

तीसरी बार साल 2018 में सेम कहानी दोहराई गई। बेल्जियम ने रोमांचक मुकाबले में जापान को हराया। सेमीफाइनल में बेल्जियम, फ्रांस से हार गया और फ्रांस चैंपियन बना। साल 2022 में जापान पेनल्टी शूटआउट में क्रोएशिया से हार गया। क्रोएशिया बाद में अर्जेंटीना से हारा और अर्जेंटीना ने विश्व कप जीता। चार वर्ल्ड कप में एक जैसी घटना के बाद यह थ्योरी फुटबॉल फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गई और 'जापान कर्स' के नाम से फेमस हो गई।

थ्योरी पर उठे सवाल

कुछ फैंस ने इस रहस्यमयी कहानी पर सवाल उठाया हैं कि इस ट्रेंड में 2006 और 2014 के वर्ल्ड कप को क्यों छोड़ दिया गया है। इसका जवाब सीधा है। जापान इनमें से किसी भी टूर्नामेंट में नॉकआउट राउंड के लिए क्वालीफाई ही नहीं कर पाया था। 2006 में ऑस्ट्रेलिया, क्रोएशिया और ब्राजील के खिलाफ मिली हार के चलते जापान ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया था। वहीं, 2014 में आइवरी कोस्ट, ग्रीस और कोलंबिया के खिलाफ हार के बाद जापान फिर से ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गया था। जापान इन दोनों एडिशन में नॉकआउट स्टेज तक नहीं पहुंच पाया, इसलिए जापान कर्स के क्रम में इसे नहीं शामिल करते हैं। जापान कर्स की थ्योरी यह थी कि जब-जब जापान नॉकआउट में हारा तब-तब हराने वाली टीम को जिस टीम ने हराया वह चैंपियन बनीं।

इंग्लैंड ने तोड़ा 'जापान कर्स'

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जब जापान राउंड ऑफ 32 में ब्राजील से हार गया और इसके कुछ दिन बाद नॉर्वे ने ब्राजील को 2-1 से हरा दिया, तब यह फिर से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब 'जापान कर्स' नॉर्वे को विश्व चैंपियन बनाएगा। नॉर्वे को लेकर तरह-तरह की भविष्वाणियां होने लगीं। हालांकि, इस कहानी का अंत जल्दी ही हो गया। 11 जुलाई को खेले गए क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड ने नॉर्वे को 2-1 से हरा दिया। इस जीत के साथ न केवल नॉर्वे का सफर समाप्त हुआ, बल्कि फुटबॉल फैंस की नजर में 'जापान कर्स' का सिलसिला भी टूट गया।

मैच के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने कहा कि इंग्लैंड ने 'जापान कर्स' को खत्म कर दिया, जबकि कुछ ने मजाक में दावा किया कि अब यह रहस्यमयी पैटर्न इंग्लैंड के पास पहुंच गया है।

क्या सच में कोई 'जापान कर्स' है?

इस सवाल का सीधा जवाब है, नहीं। यह केवल फुटबॉल फैंस द्वारा देखे गए संयोगों पर आधारित एक वायरल थ्योरी है। इसका कोई वैज्ञानिक और आधिकारिक आधार नहीं है। विशेषज्ञ इसे फुटबॉल फोकलोर (Football Folklore) और फैन कल्चर का हिस्सा मानते हैं। यानी यह संयोग मात्र भर है।

Umesh Kumar
उमेश कुमार author

उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से... और देखें

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