कॉमवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक लगाने वाली भारत की स्टार वेटलिफ्टर स्वदेश लौट आई हैं। उन्होंने अभी से एशियाई खेलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है और इसकी तैयारी ग्लासगो से ही शुरू हो गई। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में गोल्ड जीतने वाली चानू ने स्वदेश लौटने के बाद एएनआई से बात की। उन्होंने कहा 'हमारे पास ज्यादा समय नहीं है क्योंकि एशियाई खेल मेरे लिए बहुत कठिन मुकाबला होगा। चूंकि ये बहुत करीब है, इसलिए मैंने प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। मैं पूरी तरह से इस पर ध्यान केंद्रित करूंगी। मैं एशियाई खेलों में भारत के लिए एक बार फिर उसी रंग का पदक जीतना चाहती हूं,"
भारत को दिलाया था पहला गोल्ड
मीराबाई चानू ने इस बार भारत को पहला गोल्ड दिलाया था। उन्होंने 48 किलोग्राम भारवर्ग में स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम भार उठाकर कुल 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड बनाया और लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ ही वह लगातार चार CWG मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। उन्होंने ग्लासगो 2014 में सिल्वर, गोल्ड कोस्ट 2018, बर्मिंघम 2022 और अब ग्लासगो 2026 में गोल्ड जीता।
मेडल मिलने पर परेशानी याद नहीं रहती
मीराबाई चानू ने मेडल को एथलीट का पारितोषिक बताया। उन्होंने कहा 'पदक मिलने पर हम सारी कठिनाइयां भूल जाते हैं और खुशी में डूब जाते हैं। इसी पदक के लिए हमने सबसे मुश्किल दौर का सामना किया। यह पदक भारत के लिए है,"
पूरे देश का शुक्रिया, बोलीं चानू
मीराबाई चानू ने समर्थन के लिए पूरे देश का शुक्रिया कहा' यह सबका प्यार है। उन्होंने मेरे लिए प्रार्थना की है। मेरा एकमात्र लक्ष्य भारत के लिए पदक जीतना था। इसके अलावा, पूरे भारत ने मुझे प्यार दिया। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद,"
कोच को दिया मेडल का श्रेय
मीरा ने अपने कोच विजय शर्मा की तारीफ की। उन्होंने कहा 'विजय सर जैसा कोच पाकर मैं बहुत भाग्यशाली हूं, उन्होंने हर छोटी-छोटी बात में मेरा साथ दिया है और मुझे प्रेरित किया है। खिलाड़ी जीते या हारे, हारने पर उन्हें कैसे सहारा देना है और प्रेरित करना है। सर को सब पता है। जब हम हारते हैं, तो वे मुझे बताते हैं कि हमें क्या बदलाव करने हैं और भविष्य के लिए क्या योजना बनानी है। सर जैसा व्यक्ति पाकर मैं बहुत भाग्यशाली हूं,"
साथ देने के लिए पीएम का शुक्रिया
मीराबाई ने बधाई देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।“मैं उन्हें दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं। सर हर मैच और हर चैंपियनशिप में हर खिलाड़ी को प्रतियोगिता से पहले और वापस आने के बाद प्रेरित करते हैं। ऐसा लगता है कि सर ने हमें इतना प्रेरित किया है, इसलिए हम भारत के लिए कुछ कर दिखाएंगे। सर हर खिलाड़ी की स्थिति जानते हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि ऐसा प्रधानमंत्री हमारे साथ खड़ा है और खिलाड़ियों को इतना प्यार देता है। इसलिए हम बहुत भाग्यशाली हैं।
पोडियम पर खड़े होने का भाव कैसा
मीराबाई चानू ने कहा 'जब मैं मंच पर खड़ी थी, तो मेरे मन में कई बातें आईं। उन चार वर्षों के दौरान मैंने जो कुछ भी सहा। मंच पर खड़े होना, हमारे तिरंग को ऊपर जाते देखना, और जब हमारा राष्ट्रगान बजा, तो मैं अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाई। मेरे मन में जो कुछ भी चल रहा था, वह सब बाहर आ गया। वे खुशी के आंसू थे," नई दिल्ली पहुंचने पर मीराबाई का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। भारत की ओर से इस बार 11 वेटलिफ्टरों में से 8 ने मेडल अपने नाम किया।
