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Paris Olympics 2024: मेडल के करीब पहुंच गई थीं मीराबाई चानू, लेकिन फिर हुआ कुछ ऐसा...

Paris Olympics 2024, Mirabai Chanu Close to Winning Medal: भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू पेरिस ओलंपिक 2024 में मेडल के करीब पहुंचकर मेडल से चूक गईं। मेडल जीतना हमेशा से ही उनकी उम्र और चोटों के कारण एक चुनौतीपूर्ण काम था, लेकिन यह असंभव नहीं था। हालांकि, वे पेरिस ओलंपिक में चौथे नंबर पर रही थीं।

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मीराबाई चानू। (फोटो- Mirabai Chanu X)

Photo : Twitter

Paris Olympics 2024, Mirabai Chanu Close to Winning Medal: मीराबाई चानू का लगातार दूसरा ओलंपिक पदक जीतना हमेशा से ही उनकी उम्र और चोटों के कारण एक चुनौतीपूर्ण काम था लेकिन यह असंभव नहीं था। हालांकि स्टार भारतीय भारोत्तोलक मीराबाई ने पेरिस में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से काफी कमतर वजन उठाकर अपनी राह मुश्किल की और चौथे स्थान पर रहकर पदक से चूक गईं। तीन साल पहले तोक्यो में रजत पदक जीतकर देश की इस शीर्ष भारोत्तोलक ने इस खेल में भारत के ओलंपिक पदक के 21 साल के इंतजार को खत्म कर दिया था लेकिन पिछले हफ्ते फ्रांस की राजधानी में मीराबाई ने अपने छह में से तीन प्रयास में फाउल किया जिसमें से दो क्लीन एवं जर्क वर्ग में आए जिसे उनका मजबूत पक्ष माना जाता है।

पूर्व विश्व चैंपियन मीराबाई ने साउथ पेरिस एरेना में स्नैच में 88 किग्रा वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए खुद को तीसरे स्थान पर रखा। मीराबाई का क्लीन एवं जर्क में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन चीन की होउ झिहुई के बाद दूसरे स्थान पर था और रोमानिया की मिहाइला कैम्बेई तथा थाईलैंड की सुरोदचाना खंबाओ से काफी अधिक था जिससे उम्मीद थी कि मीराबाई एक बार फिर रजत पदक हासिल करेंगी। मीराबाई का क्लीन एवं जर्क में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 119 किग्रा है लेकिन उन्होंने अपने तीसरे और अंतिम प्रयास में 114 किग्रा वजन उठाने का विकल्प चुना जिससे उन्हें कांस्य पदक मिल सकता था।

राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने हमेशा कहा है कि स्वर्ण जीतने के लिए कुल 205-206 किग्रा भार उठाने की आवश्यकता होती है और वे इसे हासिल करने के लिए ट्रेनिंग कर रहे थे। उनकी गणना सही थी लेकिन मीराबाई रणनीति को सही तरह से अंजाम नहीं दे पाई। मीराबाई ने कुल 199 किग्रा वजन उठाया जो कांस्य जीतने वाली थाईलैंड की भारोत्तोलक के प्रयास से सिर्फ एक किलोग्राम कम था। अगर मीराबाई ने क्लीन एवं जर्क में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया होता तो वह आज ओलंपिक चैंपियन हो सकती थीं।

चानू ने क्लीन एवं जर्क में विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के बाद बढ़ते हुए मनोबल के साथ तोक्यो खेलों में प्रवेश किया था लेकिन पेरिस खेलों से पहले अपने आखिरी टूर्नामेंट वह 184 किग्रा (81 किग्रा और 103 किग्रा) वजन ही उठा सकीं जो कई वर्षों में उनका खराब प्रदर्शन था। टोक्यो और पेरिस ओलंपिक के बीच तीन वर्षों में उन्होंने केवल पांच टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। खेल मंत्रालय ने पेरिस ओलंपिक चक्र में उन पर दो करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए जिसमें उन्हें मई 2023 में अमेरिका में पूर्व भारोत्तोलक से फिजिकल थेरेपिस्ट और स्ट्रेंथ एवं अनुकूलन कोच बने डॉ. आरोन होर्शिग के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग के लिए भेजना भी शामिल है।

होर्शिग की सेवा ओलंपिक पूर्व ट्रेनिंग शिविर के लिए भी ली गई। मीराबाई के लिए यह ओलंपिक चक्र चोटों से भरा रहा है। वह पेरिस में प्रतिस्पर्धा के ठीक एक दिन बाद 30 वर्ष की हो गईं। विश्व चैंपियनशिप 2023 के दौरान उन्हें कलाई में चोट लग गई थी लेकिन फिर भी वह रजत पदक जीतने में सफल रहीं। उन्होंने इसके बाद 2023 एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया जिसमें वह पांचवें स्थान पर रहीं। इसके बाद मीराबाई 2023 एशियाई खेलों में वापस लौटीं लेकिन कूल्हे की चोट से परेशान रहीं। अपने शरीर के वजन से दोगुना वजन उठाने के तनाव और चोटों ने मीराबाई पर असर डाला है।

(भाषा)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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