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FIFA अध्यक्ष इन्फेंटीनो को हटाने के लिए घेराबंदी शुरू, La Liga के प्रमुख ने भरी पहली हुंकार

जेवियर टेबास ने कहा कि FIFA चीफ जियानी इन्फेंटिनो को अपने पद से हट जाना चाहिए, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है। टेबास को इस बात पर बहुत कम भरोसा है कि लीडरशिप में कोई बदलाव होगा; उनका कहना है कि FIFA का मौजूदा सिस्टम चुनौती देने वालों को हतोत्साहित करता है।

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फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटीनो

Photo : AP

ला लीगा के प्रेसिडेंट जेवियर टेबास ने कहा कि FIFA चीफ जियानी इन्फेंटिनो को अपने पद से हट जाना चाहिए, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है। टेबास को इस बात पर बहुत कम भरोसा है कि लीडरशिप में कोई बदलाव होगा; उनका कहना है कि FIFA का मौजूदा सिस्टम चुनौती देने वालों को हतोत्साहित करता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भले ही कई लोग निजी तौर पर इन्फेंटिनो की लीडरशिप और फैसलों से असहमत हों, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से उनका विरोध करने या उन्हें गंभीर चुनौती देने को तैयार नहीं हैं।

टेबास ने कहा, "मेरी राय में, हां, मुझे लगता है कि उनका समय खत्म हो चुका है। उन्हें पद पर नहीं बने रहना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए वे पद नहीं छोड़ेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "कोई विपक्षी उम्मीदवार नहीं है; कोई भी हारने के लिए चुनाव नहीं लड़ना चाहता। यह सिस्टम ही ऐसा है, और यह सिस्टम शुरू से ही खराब है। मैंने इन्फेंटिनो के खिलाफ़ बहुत से लोगों को सुना है, जो उनके कामों से सहमत नहीं हैं। वे बोलते तो हैं, लेकिन फिर कुछ करते नहीं हैं।"

टेबास ने वर्ल्ड कप में रेड कार्ड मिलने के बाद अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच के सस्पेंशन को वापस लेने के FIFA के फैसले की भी आलोचना की और इसे "बेहद गंभीर मामला" बताया।

उन्होंने कहा कि FIFA खुशकिस्मत था कि बेल्जियम ने अमेरिका को हरा दिया, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो यह विवाद एक बड़ा मुद्दा बन सकता था और इसके नतीजे FIFA प्रेसिडेंट जियानी इन्फेंटिनो को भुगतने पड़ सकते थे।

टेबास ने इस घटना को FIFA के कामकाज को लेकर व्यापक चिंताओं के मामले में "बड़ी समस्या का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा" (टिप ऑफ़ द आइसबर्ग) बताया।

"अमेरिकी खिलाड़ी पर लगे बैन को हटाना बेहद गंभीर मामला है। वे खुशकिस्मत थे कि बेल्जियम ने अमेरिका को हरा दिया, क्योंकि वरना ऐसा मामला खड़ा हो सकता था जिससे इन्फेंटिनो की नौकरी जा सकती थी। चूँकि बेल्जियम जीत गया, इसलिए वे मामले को दबाने में कामयाब रहे। लेकिन ये चीजें बड़ी समस्या का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा हैं।"

बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ़ 'राउंड ऑफ़ 32' में अमेरिका की 2-0 से जीत के दौरान रेड कार्ड मिलने के बाद बालोगुन पर एक मैच का बैन लगाया गया था, जिसे FIFA ने बाद में हटा दिया, जिससे वे बेल्जियम के खिलाफ़ खेल सके। इस तरह विवाद के बीच बालोगुन का टूर्नामेंट खत्म हुआ।

इस फैसले पर बेल्जियम ने आपत्ति जताई थी, लेकिन FIFA ने विरोध को खारिज कर दिया और 'राउंड ऑफ़ 16' के मैच के लिए बालोगुन की पात्रता को बरकरार रखा। हालांकि, बेल्जियम ने अमेरिका का सफ़र खत्म कर दिया, जिससे वे कनाडा और मैक्सिको के बाद टूर्नामेंट के तीनों सह-मेज़बानों में से बाहर होने वाले आखिरी देश बन गए।

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

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