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Vijay Kumar Birthday: एक ऐसा हीरो जिसे भुलाया नहीं जा सकता, ओलंपिक में सिल्वर मेडल पर लगा चुके हैं निशाना

Vijay Kumar Birthday: लंदन ओलंपिक 2012 में सिल्वर मेडल पर निशाना लगा चुके विजय कुमार के लिए आज का दिन काफी स्पेशल है। वे आज 39 साल के हो गए हैं। उन्होंने ओलंपिक में भारत के एकमात्र 25 मीटर रैपिड फाइनल पिस्टल इवेंट में मेडल जीत चुके हैं।

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विजय कुमार। (फोटो- Team India X)

Photo : Twitter

Vijay Kumar Birthday: ओलंपिक में भारत के एकमात्र 25 मीटर रैपिड फाइनल पिस्टल इवेंट के मेडलिस्ट विजय कुमार सोमवार को 39 साल के हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए विजय कुमार बचपन से ही बंदूक को लेकर आकर्षित थे। एक सामान्य आकर्षण से शुरू हुआ उनका सफर, कड़ी मेहनत और जुनून के साथ ओलंपिक सिल्वर मेडल के मुकाम तक पहुंचा था। विजय कुमार आर्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं। वह साल 2001 में भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। उनके पिता भी आर्मी में थे। भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद, विजय कुमार को सेना की ऐसी अनुशासित दुनिया मिली, जिसने उनके रिफ्लेक्स, फोकस और दृढ़ संकल्प को और तराशा। जल्द ही शूटिंग रेंज उनके लिए युद्ध का मैदान बन गया, जहां हर गोली अपने टारगेट को भेदने के लिए परफेक्शन की तलाश में निकलती थी।

2012 के लंदन ओलंपिक का मेडलिस्ट यह निशानेबाज 2008 में भी ओलंपिक डेब्यू करने के लिए तैयार था। लेकिन तब चिकन पॉक्स के कारण वह बीजिंग ओलंपिक का हिस्सा नहीं बन पाए थे। 2012 के लंदन ओलंपिक में उनको मिली जीत सिर्फ एक पदक तक सीमित नहीं थी; यह जबरदस्त बाधाओं के खिलाफ जज्बे की जीत भी थी। ओलंपिक पदक जीतने के बाद भी विजय कुमार का जीवन काफी साधारण रहा। एक ओलंपिक मेडलिस्ट को आमतौर पर जो स्टारडम मिल जाता है, वह विजय को नहीं मिला। इसलिए विजय कुमार को अक्सर 'एक भूला दिए गए हीरो' के तौर पर याद किया जाता है।

विजय कुमार के सेना में करियर की बात करें तो उन्हें सेना में सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया था। उन्होंने 2017 में आर्मी से रिटायरमेंट के बाद अपनी आगे की पढ़ाई पर ध्यान दिया। उनके पास बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री है और वह हिमाचल प्रदेश पुलिस में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं। हिमाचल प्रदेश में नौकरी के बाद उन्होंने 'स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया' में हाई परफॉरमेंस कोच के पद पर भी आवेदन किया। एक ओलंपिक मेडलिस्ट होने के बावजूद जब उनको इस पद के लिए नहीं चुना गया तो उन्होंने हैरानी जताई थी। तब तक उनको पद्मश्री, खेल रत्न और अर्जुन अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके थे।

भारत के ओलंपिक मेडलिस्ट निशानेबाजों की सूची पर एक नजर डालें, तो राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग जैसे निशानेबाजों को खूब शोहरत मिली है। मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में दो मेडल जीतने के बाद लोकप्रियता के अगले मुकाम पर पहुंच चुकी हैं। सरबजोत सिंह और स्वप्निल कुसाले भी दो नए उभरते हुए सितारे हैं। इस लिस्ट में विजय कुमार 'भूला दिए गए हीरो' की तरह जरूर नजर आ सकते हैं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वह एक 'हीरो' हैं, एक ऐसे हीरो जिन्होंने राज्यवर्धन सिंह राठौड़, अभिनव बिंद्रा जैसे शूटरों के ओलंपिक पदक जीतने के सिलसिले को आगे बढ़ाया। एक ऐसे हीरो जिन्होंने लंदन ओलंपिक में भारत की ऐतिहासिक सफलता में अहम योगदान दिया और देश को ओलंपिक में आगे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए एक प्रेरक बनकर उभरे।

(आईएएनएस)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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