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EXCLUSIVE: 'गोल्ड का सपना अभी टूटा नहीं है', एंसी सोजन ने किया बाउंस बैक का वादा

एंसी सोजन ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि शैली सिंह एशियन गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से चूक गईं। एंसी सोजन 6.53m का अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने टाइम्स नाउ से बातचीत के दौरान बारिश में खेलने का अनुभव साझा किया।

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लॉन्ग जंपर एंसी सोजन। फोटो- AP

करिश्मा सिंह, आइची नागोया। लॉन्ग जम्पर एंसी सोजन ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और उन्होंने एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 6.53m की बेस्ट कोशिश की। एंसी टेबल में सबसे आगे थीं और गोल्ड मेडल जीतने के करीब थीं। लेकिन चीन की हुआंग यिंगयिंग ने 6.55m की बेस्ट कोशिश के साथ एंसी को पछाड़कर गोल्ड मेडल जीत लिया। एंसी से टाइम्स नाउ ने बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि गोल्ड मेडल न जीत पाने से निराशा हुई लेकिन, यह सिर्फ अभी शुरुआत है।

सवाल- लगातार दो सिल्वर मेडल, आपके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान है। इस समय आपको कैसा लग रहा है?

एंसी का जवाब- मैं बहुत आभारी हूं। सबसे पहले, उन सभी का धन्यवाद जो मेरा समर्थन कर रहे हैं। मैं इसके लिए बहुत खुश महसूस कर रही हूं। मैं दो बार एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीत चुकी हूं। किस्मत की बात है कि बस दो सेंटीमीटर से मेरा गोल्ड मेडल चूक गया। लेकिन यह अंत नहीं है, मैं फिर से वापसी करूंगी। अभी और भी कई मौके हैं। मैं इसे किसी भी तरह हासिल करूंगी।

सवाल- जैसा कि आपने कहा, आप बहुत कम अंतर से चूक गईं। क्या आप इसे अपने सबसे अच्छे प्रदर्शनों में से एक मानती हैं?

एंसी का जवाब- मुझे लगता है कि इस तरह के मौसम में यह मेरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है। मैंने अपनी पूरी कोशिश की और भगवान ने कहा कि आज यह सिर्फ तुम्हारे लिए है। बस दो सेंटीमीटर और आखिरी पल में चूक गई। आज मेरा दिन नहीं था, लेकिन किस्मत ऐसी ही है।

सवाल- आपका लुक बहुत अच्छा है। क्या यह कॉम्पिटिशन के दिनों में भी आपकी रूटीन का हिस्सा है? और यह कैसे शुरू हुआ?

एंसी का जवाब- बात यह है कि मुझे खुद को रानी की तरह महसूस कराना पसंद है और मुझे बहुत सारी एक्सेसरीज पहनना पसंद है। मैं खुद को कॉन्फिडेंट बनाना चाहती हूं और दिखाना चाहती हूं कि भारतीय जंपर्स खराब नहीं हैं। तो, इससे मुझे भी मदद मिल रही है। मैं दिखाना चाहती हूं कि मैं बहादुर और हिम्मत वाली हूं। मैं खुद को और कॉन्फिडेंट बनाना चाहती हूं और यह भी दिखा रही हूं कि हम आने वाले जंप्स में और भी मेडल जीत सकते हैं।

सवाल- क्या इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है?

एंसी का जवाब- हां, बिल्कुल, ऐसा लगता है कि मैं पूरी तरह तैयार हूं।

सवाल- देश की युवा लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?

एंसी का जवाब- मैं उनसे यही कहना चाहती हूं कि मुझे पिछले साल एशियन गेम्स का मेडल जीतने में 10 साल लगे। और इस दौरान बहुत उतार-चढ़ाव भी आए। अगर आपका कोई बड़ा सपना है, तो आपको उसे बनाए रखना होगा। उतार-चढ़ाव इस सफर का हिस्सा हैं। हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी आपको ऊपर जाना पड़ता है, तो कभी नीचे। यह भरोसे की बात है। आपको बस कड़ी मेहनत करनी है, अच्छाई में यकीन रखना है, प्रोसेस पर भरोसा करना है, कोच पर भरोसा करना है और बाहरी चीजों के बारे में नहीं सोचना है। सबसे पहले आपको खुद पर भरोसा करना होगा और आगे बढ़ते रहना होगा।

सवाल- जब हम एशियन गेम्स की बात करते हैं, तो आपने खुद के लिए क्या खास सीखा?

एंसी का जवाब- हर मेडल और कामयाबी मेरे लिए एक अनुभव और सबक की तरह है। इसलिए यह एशियन गेम्स भी एक सबक और अनुभव की तरह है। मैं बारिश में कैसे कूद सकती थी? मैंने देखा है कि कई इंटरनेशनल एथलीट भी ऐसा ही करते हैं। जब वे 7 मीटर कूदते थे और फिर 6.43 पर आ जाते थे, तो मैं सोचती थी कि वे ऐसा क्यों करते हैं। अब मुझे समझ आया कि ऐसा क्यों हुआ। लेकिन वे भी अपना 100% दे रहे होते हैं। तो बारिश में कूदना भी मेरे लिए एक अनुभव रहा।

Umesh Kumar
उमेश कुमारauthor

उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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