ग्लास्गो: स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में चल रहे 23वें राष्ट्रमंडल खेलों का आधिकारिक तौर पर समापन शनिवार देर रात साल 2030 में भारत के अहमदाबाद में मिलने के वादे के साथ हो गया। समापन समारोह में भारतीय दल का नेतृत्व गोल्ड मेडलिस्ट बॉक्सर जैस्मिन लंबोरिया ने किया। ग्लास्गो स्थित द हाइड्रो में आयोजित समापन समारोह के दौरान राष्ट्रमंडल खेलों का आधिकारिक झंडा 2030 के मेजबान देश भारत को सौंपा। भारत दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा। साल 2010 में राजधानी नई दिल्ली ने 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की थी। 20 साल बाद गुजरात का अहमदाबाद इन खेलों की मेजबानी करने वाला भारत का दूसरा शहर बन जाएगा।
हैंडओवर सेरेमनी में दिखी भारतीय संस्कृति-परंपरा की झलक
समापन समारोह में फ्लैग हैंडओवर सेरेमनी के दौरान भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा और गुजरात के मुख्यमंत्री हर्ष संघवी मंच पर मौजूद थे। कॉमनवेल्थ गेम्स फेडेरेशन के अध्यक्ष डॉ डोनाल्ड रुकारे ने नीरज चोपड़ा के हाथों में झंडा सौंपा। इसके बाद वंदे मातरम के उद्घोष के साथ भारतीय संस्कृति की झलक मंच पर देखने को मिली।

राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह में प्रस्तुति देतीं मानुषि छिल्लर
पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने डांस दल को लीड किया। भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक पोषाकों में कलाकार शास्त्रीय और लोक शैलियों में नृत्य करते नजर आए। वंदे मातरम के साथ वसुधैव कुटुंबकम(पूरा विश्व एक परिवार है) का संदेश भी दिया गया। मंच पर भारत की धार्मिक आस्था का प्रदर्शन भी किया गया। शिव तांडव स्त्रोत पाठ पर भी कलाकारों ने मंचन किया।
दिखी गुजरात और गरबे की झलक
मशहूर गायक शंकर महादेवन ने बॉलीवुड के लोकप्रिय गीत ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू... गाकर आयोजन स्थल पर मौजूद दर्शकों और खिलाड़ियों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने मिल्खा सिंह फिल्म के गीत भाग मिल्खा भी गाया। महादेवन के बाद गायिका भूमि त्रिवेदी मंच पर गुजरात की महक लेकर आईं और गुजराती और गरबा गीत गाकर दुनिया को अगले राष्ट्रमंडल खेलों के लिए अहमदाबाद आने का न्यौता दिया। इसके बाद लहरा दो...गीत पर कलाकार भारतीय तिरंगा लहराते हुए मंच पर नजर आए। सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद सारा स्टेडियम तालियों और भारत माता की जय के उद्घोष से गूंज उठा।

राष्ट्रमंडल खेल समापन समारोह
अहमदाबाद में मनेगा 100 साल का जश्न
24वें राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन साल 2030 में गुजरात के अहमदाबाद में होगा। अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेलों के 100 वर्ष पूरे होंगे इस लिए उसे शताब्दी राष्ट्रमंडल खेल (Centenary CWG) भी कहा जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत साल 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में 'ब्रिटिश एम्पायर गेम्स' के नाम से हुई थी। साल 1954 में इसका नाम बदलकर ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स कर दिया गया जो 1966 तक रहा। 1970 में इसे ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स कहा जाने लगा और ये नाम 1974 तक रहा। 1978 में इन खेलों को कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) नाम दिया गया जो अबतक जारी है। पहले राष्ट्रमंडल खेलों में 11 देश के तकरीबन 400 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। ग्लास्गो में 74 देशों के 3 हजार खिलाड़ियों ने शिरकत की। अहमदाबाद में शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों में 74 देश भाग लेंगे लेकिन खिलाड़ियों की संख्या में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
ऑस्ट्रेलिया रहा पहले, भारत चौथे पायदान पर
11 दिन तक चले ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत पदक तालिका में चौथे पायदान पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद रहा। ऑस्ट्रेलिया ने 15वीं बार पदक तालिका में पहले पायदान पर कब्जा किया। 70 गोल्ड, 45 रजत और 56 कांस्य सहित ऑस्ट्रेलिया ने कुल 171 पदक जीते। इंग्लैंड 110 पदक(29 गोल्ड, 45 रजत और 36 कांस्य) के साथ दूसरे और कनाडा 62 मेडल (19 गोल्ड, 20 सिल्वर और 23 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
