FIFA World Cup 2026: फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच सज चुका है। FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात वो मैच होने जा रहा है जिस पर पूरी दुनिया की नजर होगी। आज के मुकाबले में एक तरफ चार बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी है और दूसरी तरफ वर्ल्ड कप में डेब्यू करने जा रहा देश कुरासाओ है। यह मैच भारतीय समयानुसार आज रात 10:30 बजे ह्यूस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा। कुरासाओ साउथ कैरेबियन सागर और डच कैरेबियन एरिया में छोटा-सा द्वीपीय देश है। कुरासाओ नीदरलैंड के साम्राज्य का एक घटक देश है। कुरासाओ ने नवंबर 2025 में पहली बार FIFA वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया था।
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कुरासाओ फीफा विश्वकप फुटबॉल के लिए क्वालीफाई करने वाला अब तक का सबसे छोटा देश बनकर इतिहास रचा था। किंग्स्टन के नेशनल स्टेडियम में 90 मिनट तक चले मुकाबले में कुराकाओ ने जमैका के बीच गोलरहित ड्रॉ खेला था, जिसके बाद लगभग डेढ लाख की आबादी वाले कुरासाओ देश में जश्न शुरू हो गया था। अब कुरासाओ जर्मनी से भिड़ने जा रहा है।
गोवा से छोटा लेकिन हौसला पहाड़ जैसा
कुरासाओ देश के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। यह देश भारत के सबसे छोटे राज्य गोवा से तकरीबन 9 गुना छोटा है। जहां गोवा का एरिया 3702 वर्ग किमी है, वहीं कुरासाओ सिर्फ 444 वर्ग किमी में बसा है। आबादी भी सिर्फ 1.5 लाख के आसपास। इससे ज्यादा आबादी तो नोएडा के किसी एक सेक्टर में होती है। आज यह छोटा सा देश जर्मनी जैसी दिग्गज टीम के सामने अपना वर्ल्ड कप का पहला फुटबॉल मैच खेलने जा रहा है। इसे आप फुटबॉल का जादू कह सकते हैं। कुरासाओ नीदरलैंड किंगडम का हिस्सा है और वेनेजुएला के तट से सिर्फ 65 किमी दूर बसा है। राजधानी विलेमस्टाड अपने रंग-बिरंगे डच आर्किटेक्चर के लिए UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। यहां की पहचान है नीली कुरासाओ लिकर, जो लोकल लाराहा संतरे के छिलके से बनती है।
अनुभव और जज्बे की जंग
वर्ल्ड कप के ग्रुप-E में आज कुरासाओ की भिड़ंत जर्मनी से होने जा रही है। कुरासाओ के कोच 76 साल के दिग्गज डिक एडवोकेट हैं। वो नीदरलैंड और रूस जैसी टीमों की कोचिंग कर चुके हैं। वहीं जर्मनी फ्लोरियन विर्ट्ज और जमाल मुसियाला जैसे यंग सुपरस्टार्स के दम पर उतरेगी। कागज पर भले ही जर्मनी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है, लेकिन वर्ल्ड कप जैसे मंच पर उलटफेर की कहानियां तो बनती ही हैं। कुरासाओ की टीम में ज्यादातर खिलाड़ी यूरोप की लीग्स में खेलते हैं। उनके पास खोने को कुछ नहीं है। वहीं दूसरी तरफ जर्मनी पर प्रेशर होगा।
