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शतक जड़ने के बाद यशस्वी जायसवाल ने दिया धोनी जैसा जवाब, सुनकर रह जाएंगे हैरान

कुछ समय के खराब प्रदर्शन के बाद फॉर्म में लौटे युवा भारतीय बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल का कहना है कि वे शानदार प्रदर्शन करने के लिए 'प्रक्रिया, रूटीन और अनुशासन' पर भरोसा करते हैं। हाल ही में उन्होंने न्यूजीलैंड ए के खिलाफ खेले गए दूसरे अनौपचारिक टेस्ट में इंडिया ए के लिए शतकीय पारी खेली।

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यशस्वी जायसवाल ने शतक जड़ने के बाद दिया बड़ा बयान। फाइल फोटो

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। इंडिया ए और न्यूजीलैंड ए के बीच दूसरा अनौपचारिक टेस्ट ड्रॉ रहा, जिसमें जायसवाल ने नाबाद 155 रन बनाए। जायसवाल ने बताया कि यहां की ठंड उनके लिए एक अलग तरह की चुनौती लेकर आई। उन्होंने कहा, यहां बहुत ठंड है। शुरुआत में गेंद काफी मूव करती है और उसमें काफी सीम मूवमेंट होता है। साथ ही, यहां अच्छे गेंदबाज हैं जो लगातार सही जगहों पर गेंदबाजी कर रहे हैं। इसलिए, शुरुआत में रन बनाने के लिए हमें काफी इंतजार करना पड़ता है।'

उन्होंने आगे कहा, 'इसके बाद, जब विकेट बेहतर हो जाता है या गेंद पुरानी हो जाती है, तो रन बनाना आसान हो जाता है। मैं यह तो नहीं कहूंगा कि यह बहुत आसान है, लेकिन आप अच्छे शॉट्स खेल सकते हैं। इसलिए मुझे बहुत मजा आया और यहां खेलना अच्छा लगा। यह एक बिल्कुल अलग अनुभव है।' यह शानदार पारी ऐसे समय में आई है जब भारत 19 नवंबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने की तैयारी कर रहा है।

प्रोसेस, रूटीन और अनुशासन पर दिया ध्यान

उन्होंने समझाया, 'यह इतना आसान नहीं है... बस अपनी प्रक्रिया, रूटीन और अनुशासन पर ध्यान दें। मुझे लगता है कि यहां आपको बहुत अनुशासित रहने की जरूरत है।' न्यूजीलैंड दौरे की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए, जायसवाल ने बताया कि यहां सबसे बड़ी चुनौती यहां का ठंडा मौसम है।

'यहां बहुत ठंड'

उन्होंने कहा, न्यूजीलैंड, भारत, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक कि इंग्लैंड की तुलना में भी एक बहुत अलग जगह है। क्योंकि यहां बहुत ठंड है। अगर आप आसमान की तरफ देखें, तो पूरे दिन बादल छाए रहे। फिर कुछ देर के लिए धूप निकली और चली गई। पिछले चार दिनों से ऐसा ही चल रहा है। जब उनसे पूछा गया कि वे परिस्थितियों के हिसाब से अपनी तकनीक में कैसे बदलाव करते हैं, तो जायसवाल ने कहा कि उन्हें अपने शरीर के करीब खेलना पसंद है।

'मैं रन बनाने की कोशिश करूंगा'

जायसवाल ने कहा, मेरे दिमाग में मुख्य बात यह है कि मैं अपने शरीर के जितना करीब खेलूंगा, उतना ही बेहतर होगा। गेंद के पास जाएं और खेलें। अगर आप पहली पारी को देखें, तो मेरा शुरुआती स्टांस थोड़ा पीछे था। फिर मैंने उसमें बदलाव किया। अगर गेंदबाज तेज गेंदबाजी नहीं कर रहा है, तो आप सीम मूवमेंट को संभाल सकते हैं। अगर मुझे कोई खराब गेंद मिलती है, तो मैं रन बनाने की कोशिश करूंगा। बाकी तो बस एक कोशिश है।

    Umesh Kumar
    उमेश कुमारauthor

    उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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