अहमदाबाद: रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम इंडिया को 6 महीने के अंतराल में दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल मुकाबले में हार के बाद हार का सामना करना पड़ा है। जून में ए़डिलेड में खेले गए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में टीम मैनेजमेंट ने रविचंद्रन अश्विन को प्लेइंग-11 में शामिल नहीं किया। ऐसे में बांए हाथ के बल्लेबाज ट्रेविस हेड ने बेकाबू होते हुए अपने बल्ले का जादू दिखाया और 167 रन जड़कर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। ऑस्ट्रेलिया के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतने के बाद ट्रेविस हेड को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। टीम इंडिया को हेड को काउंटर करने के लिए अश्विन की खूब कमी खली थी। हेड ने 163(174) की पारी खेली थी।
ट्रेविस हेड को किया अंडरएस्टिमेट
ऐसा ही 6 महीने बाद एक बार फिर विश्व कप 2023 के फाइनल में रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की टीम ने वही गलती दोहरा दी और वो गलती फिर भारी पड़ गई। ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज ट्रेविस हेड को टीम इंडिया ने अंडरएस्टिमेट किया और वो अकेले दम मैच भारतीय टीम की हाथों से खींच ले गए। इसके साथ ही रोहित एंड कंपनी का विश्व चैंपियन बनने का सपना टूट गया।
अश्विन की खली कमी
ट्रेविस हेड ने पिच पर पैर जमाने के बाद तेजी से बल्लेबाजी की। उन्होंनें टीम में शामिल दोनों बांए हाथ के स्पिनरों कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा की जमकर क्लास ली। बांए हाथ के बल्लेबाज के सामने बांए हाथ के स्पिनर्स की धार कुंद नजर आती है। उन्हें बल्लेबाजी करने में आसानी होती है। ऐसे में अगर रविचंद्रन अश्विन को प्लेइंग-11 में शामिल किया जाता तो ट्रेविस हेड के बल्ले पर लगाम लग सकती थी। हेड 120 गेंद में 137 रन बनाकर आउट हुए जिसमें 15 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल थे।
बांए हाथ के स्पिनर्स को किया नाकाम
कुलदीप यादव ने 10 ओवर में 43 रन दिए वहीं रवींद्र जडेजा ने 10 ओवर में 56 रन दिए। दोनों ही गेंदबाज विकेट चटकाने में नाकाम साबित हुए। उनकी गेंदों पर 4 चौके और 3 छक्के निकले। स्पिन आक्रमण की टीम की कमजोरी साबित हुआ और अहम मौके पर विकेट चटकाने में वो नाकाम रहा।
