भारतीय क्रिकेट टीम (फोटो क्रेडिट BCCI X)
रांची: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच से पूर्व भारत को चयन से जुड़ी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि एकादश में ऋषभ पंत की जगह पक्की नहीं है जबकि वाशिंगटन सुंदर और नितीश कुमार रेड्डी के बीच अतिरिक्त ऑलराउंडर की जगह के लिए कड़ा मुकाबला है। टीम प्रबंधन जब चयन से जुड़े सवालों का जवाब ढूंढेगा तो सफेद गेंद के सत्र की जरूरतें भी उनके दिमाग में होंगी। संतुलन और यहां की परिस्थितियां काफी हद तक चयन तय करेंगी लेकिन कई सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिए जाने के साथ श्रृंखला का पहला मैच चयनकर्ताओं की मध्यावधि योजना की एक झलक दे सकता है।
चर्चा का केंद्र यह है कि अगर पंत को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी नहीं दी जाती है तो भी क्या वह कप्तान लोकेश राहुल के साथ एकादश में फिट हो सकते हैं। गुवाहाटी टेस्ट में जिस तरह से पंत आउट हुए उसके लिए उनकी काफी आलोचना हुई है लेकिन वह हमेशा से इसी तरह का क्रिकेट खेलते रहे हैं। कप्तान राहुल अगर विकेटकीपिंग करते हैं तो थिंक-टैंक के सामने एक रणनीतिक दुविधा होगी कि क्या वे पंत को मध्य क्रम में सिर्फ बल्लेबाज के तौर पर खिला सकते हैं? पंत का खेलना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि वह बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं जबकि भारतीय बल्लेबाजी क्रम में अधिकतर बल्लेबाज दाएं हाथ के हैं। दोनों को एक साथ खिलाना नामुमकिन नहीं है लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि रांची में शाम को ठंडे मौसम में भारत को बल्लेबाजी में कितनी गहराई चाहिए जहां लक्ष्य का पीछा करने के लिए लंबे बल्लेबाजी क्रम की जरूरत पड़ सकती है।
इन दोनों के खेलने की स्थिति में सातवें नंबर पर एक बल्लेबाज या ऑलराउंडर में से किसी एक को छोड़ना पड़ सकता है। एक और अहम फैसला ऑलराउंडर के स्थान को लेकर है जिसके लिए रेड्डी और वॉशिंगटन का दावा है। रांची की पिच पारंपरिक रूप से स्पिनरों को मदद करती है लेकिन सर्दियों की शुरुआत और पिच पर थोड़ी घास से तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर का दावा भी बनता है। रेड्डी मध्यम गति की गेंदबाजी करने के अलावा डेथ ओवरों में बड़े शॉट खेल सकते हैं जबकि वॉशिंगटन पावर प्ले में नियंत्रण देने के अलावा बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ फायदा दे सकते हैं। इसके अलावा वह सातवें नंबर पर अतिरिक्त बल्लेबाज का विकल्प भी देते हैं।
अगर भारत पारंपरिक सोच अपनाता है तो वॉशिंगटन को मौका मिल सकता है जबकि अगर उन्हें गेंद से इंपैक्ट और डेथ ओवरों में पावर हिटिंग का विकल्प चाहिए तो रेड्डी को मौका मिल सकता है। तेज गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा को खिलाने की संभावना है। दक्षिण अफ्रीका के पास मैथ्यू ब्रीट्जके और एडेन मारक्रम जैसे आक्रामक बल्लेबाज हैं जिसके कारण भारत दो शीर्ष तेज गेंदबाजों और एक ऑलराउंडर के साथ उतर सकता है। ऐसे में अर्शदीप की नई गेद की स्विंग और हर्षित की तेजी गति काम आ सकती है। स्पिन विभाग में अगर वॉशिंगटन खेलते हैं तो भारत कलाई के एक स्पिनर के साथ उतर सकता है जबकि अगर वह बाहर बैठते हैं तो कुलदीप यादव और रवि बिश्नोई एक आक्रामक स्पिन जोड़ी बना सकते हैं।
तिलक वर्मा को भी मिल सकता है मौका
बल्लेबाजों में तिलक वर्मा पर भी नजरें रहेंगी जिन्होंने पिछले कुछ समय में सीमित ओंवरों के क्रिकेट में प्रभावित किया है। वह अलग-अलग क्रम पर बल्लेबाजी की काबिलियत रखते हैं और तीसरे नंबर पर आक्रामक भूमिका निभाने के अलावा पांचवें या छठे स्थान पर पारी को संवारने की भूमिका भी निभा सकते हैं। अगर भारत सिर्फ एक मुख्य स्पिनर के साथ उतरता है तो तिलक की कामचलाऊ स्पिन गेंदबाजी काम आ सकती है। संभावना है कि रविवार को वह पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करें लेकिन ऐसे में उनमें और पंत में से किसी एक को ही मौका मिलेगा।
श्रेयस अय्यर के फिट नहीं होने के कारण मध्य क्रम में बदलाव हो सकता है जिसमें रुतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी दावेदारी में होंगे। वह मुख्य रूप से सलामी बल्लेबाज हैं और यशस्वी जायसवाल का उस स्थान पर खेलना लगभग तय है। शुक्रवार को नेट्स पर गायकवाड़ ने तिलक से पहले बल्लेबाजी की और बाद में आलोचनाओं का सामना कर रहे कोच गौतम गंभीर और राहुल से बात की। आखिरी फैसला दूधिया रोशनी में परिस्थितियों पर निर्भर करेगा जिसके बारे में गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने भी इशारा किया। मोर्कल ने कहा‘कल (बृहस्पतिवार) जब मैं विमान से उतरा तो मौसम काफी ठंडा था। यह देखना दिलचस्प होगा कि शाम को गेंद कैसा बर्ताव करती है। हम आज दूधिया रोशनी में अभ्यास करेंगे इसलिए इससे हमें अच्छा अंदाजा मिलेगा।'
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