Khyber Pakhtunkhwa Emergency Pakistan: पड़ोसी देश पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के हालात को देखते हुए संघीय सरकार वहां आपातकाल लगाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसी सिलसिले में शनिवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (President Asif Ali Zardari PM Shehbaz Sharif Meeting) ने देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए एक अहम उच्चस्तरीय बैठक की।
यह बैठक जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (73) की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों द्वारा निकाले जा रहे उग्र विरोध मार्च के मद्देनजर बुलाई गई है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में यह मार्च चार अक्टूबर को लक्की मरवत से शुरू हुआ था और कई जिलों से होता हुआ आगे बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि इमरान खान से तुरंत मिलने की अनुमति दी जाए, उनके निजी डॉक्टरों को उनसे मिलने दिया जाए और हाल ही में गिरफ्तार किए गए समर्थकों व खान की पत्नी बुशरा बीबी को राहत दी जाए।
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2023 से जेल में बंद हैं पाक के पूर्व पीएम इमरान खान
इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर भ्रष्टाचार तथा हिंसा भड़काने जैसे 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। 'जियो न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को हुई बैठक में सोहेल अफरीदी के नेतृत्व वाले इस मार्च से पैदा हुए हालातों पर चिंता जताई गई और खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस गंभीर कदम पर अंतिम विचार-विमर्श के लिए रविवार को संघीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद सोमवार को इस प्रस्ताव को संसद के समक्ष पेश किया जा सकता है।
आगामी दिनों में और बड़ा भूचाल आने की संभावना
हालांकि, सरकार की ओर से नरमी के संकेत भी दिए गए हैं। गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने स्पष्ट किया है कि तनाव को कम करने के लिए तमाम विकल्पों पर बातचीत चल रही है और आपातकाल को फिलहाल 'आखिरी विकल्प' के रूप में देखा जा रहा है। इस राजनीतिक टकराव के बीच नेशनल असेंबली और सीनेट के सत्र भी 13 अक्टूबर को आहूत किए गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में देश की सियासत में और बड़ा भूचाल आने की संभावना जताई जा रही है।
