चेन्नई: भारतीय क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैच की वनडे सीरीज में 1-2 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 4 टेस्ट मैच की सीरीज में शुरुआती 2 टेस्ट में जीत हासिल करके टीम इंडिया ने 2-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। लेकिन मां की बीमारी की वजह से पैट कमिंस को स्वदेश लौटना पड़ा और टीम की कमान स्टीव स्मिथ के हाथों में आ गई। इसके बाद तो कंगारू टीम का चाल चरित्र और चेहरा पूरी तरह बदल गया।
स्मिथ के हाथों में कमान आते ही पलटी बाजी
इंदौर में जीत दर्ज करके ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सीरीज में वापसी की पुरजोर कोशिश की। इसके बाद अहमदाबाद टेस्ट बराबरी पर समाप्त हुआ गया। स्मिथ ने दो टेस्ट में कमान संभाली और ऑस्ट्रेलियाई टीम उनमें अजेय रही। इसके बाद उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया 4 साल बाद भारत के खिलाफ भारत में वनडे सीरीज जीतने में सफल रही।
दौरे पर स्मिथ की कप्तानी में मिली केवल एक हार
स्टीव स्मिथ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने भारत दौरे पर कुल पांच मैच खेले जिसमें से तीन में ऑस्ट्रेलिया को जीत मिली, एक में हार और एक मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। टेस्ट सीरीज भले ही ऑस्ट्रेलिया ने गंवाई लेकिन वनडे सीरीज 2-1 के अंतर से अपने नाम करके स्वदेश लौटी। टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा किया। भले ही वो सीरीज में बल्ले से कोई बड़ा कारनामा नहीं कर पाए लेकिन उनकी शानदार कप्तानी ने भारतीय टीम को हर वक्त दबाव में और बैकफुट पर रखा।
दौरे पर बल्ले से बुरी तरह नाकाम रहे स्मिथ
भारत दौरे पर स्टीव स्मिथ का बल्ला नाकाम रहा। दौरे पर स्मिथ ने टेस्ट सीरीज में 4 टेस्ट की 7 पारियों में 2 बार नाबाद रहते हुए कुल 145 रन बनाए। उनका टेस्ट सीरीज में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 38 रन रहा। वो एक भी पचासा नहीं जड़ पाए। यही हाल उनका वनडे सीरीज में रहा। तीन वनडे की दो पारियों में वो 11 के औसत से केवल 22 रन बना सके। चेन्नई में तो उनका खाता भी नहीं खुला। इस तरह भारत दौरे पर स्मिथ बल्ले का जादू दिखाए बगैर टीम को जीत दिलाने में सफल रहे। उन्होंने भारत दौरे पर सात मैच में 9 पारियों में 2 बार नाबाद रहते हुए 23.85 के औसत से कुल 167 रन बनाए।
