पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और स्विंग से सुल्तान के नाम से दुनियाभर में मशहूर वसीम अकरम इन दिनों हज पर हैं। वसीम ने अपनी घातक गेंदबाजी के बल पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुल 916 विकेट चटकाए जिसमें से टेस्ट में 414 और वनडे में 502 विकेट शामिल हैं। बांए हाथ कोई गेंदबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वसीम से ज्यादा विकेट नहीं चटका सका। वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तान के विकेट चटकाने के मामले में बेताज बादशाह हैं। पूरी दुनिया उनकी कायल है, क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन ने वसीम को बाएं हाथ सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज बताया था।
मीना में शैतान को वसीम ने किया बोल्ड
सालों पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके वसीम अकरम ने हज दौरे पर मीना में अपनी गेंदबाजी का मुजाहिरा पेश किया। उन्होंने शैतान को पत्थर मारने की परंपरा (रामी) को गेंदबाजी वाले अंदाज में पूरा किया। हज पर गए लोग मीना में स्थित 'पत्थर की तीन दीवारों' जिन्हें 'जमारात' कहा जाता है उसपर पत्थर मारते हैं। वसीम ने जिस अंदाज में दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज का 22 गज की पिच पर शिकार किया उसी गेंदबाजी से उन्होंने शैतान को भी क्लीन बोल्ड कर दिया। मीना में शैतान के खिलाफ की गई वसीम की गेंदबाजी देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
कैसे शुरू हुई पत्थर मारने की परंपरा?
हज के दौरान मीना में शैतान पर पत्थर मारने की परंपरा हजारों साल पहले शुरू हुई। जिस प्रकार बकरीद में प्रतीकात्मक रूप में बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसी तरह मीना में शैतान को पत्थर मारने की प्रतीकात्मक परंपरा है। इस परंपरा की कहानी हजरत इब्राहिम और उनके बेटे इस्माइल से जुड़ी है। हजरत इब्राहिम से जब अल्लाह ने उनके बेटे की कुर्बानी मांगी तो उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने के फैसला किया। लेकिन शैतान उन्हें खुदा की राह से भटकाना चाहता और उनसे कहा कि यह कैसा खुदा है जो तुमसे तुम्हारा बेटा मांग रहा है। ऐसे में हजरत इब्राहिम ने पत्थर से शैतान को मारकर भगा दिया। तब से शैतान को पत्थर मारने की परंपरा शुरू हुई जो कि आज भी बदस्तूर जारी है।
