दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को NSUI और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी नतीजों की समीक्षा की। बैठक में NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार, NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल शामिल हुए।
DUSU चुनाव में NSUI केंद्रीय पैनल की चारों सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। ABVP ने चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की, जबकि NSUI के बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इस नतीजे के बाद पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन, टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठे हैं।
राहुल गांधी ने चुनावी रणनीति पर किया मंथन
बैठक में डूसू चुनाव के दौरान NSUI की रणनीति और जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता की समीक्षा की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से यह समझने की कोशिश की कि छात्र संगठन चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं कर सका। खास तौर पर उम्मीदवारों के चयन, टिकट वितरण और कैंपस स्तर पर चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी की बैठक ऐसे समय हुई है, जब कांग्रेस की ओर से युवाओं और Gen-Z मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। DUSU का परिणाम पार्टी के लिए छात्र राजनीति और कैंपस संगठन को लेकर समीक्षा का आधार बना है।
कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से भी सवाल
बैठक में NSUI के प्रभारी कन्हैया कुमार और अध्यक्ष विनोद जाखड़ से चुनावी तैयारियों और संगठन की रणनीति को लेकर जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी नेतृत्व ने यह जानने की कोशिश की कि उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार अभियान तक किन स्तरों पर कमियां रह गईं।
टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठे हैं। NSUI से टिकट नहीं मिलने के बाद कुछ उम्मीदवारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इनमें दीपांशु शौकीन का नाम प्रमुख है, जिन्होंने बाद में उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इस घटनाक्रम ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर बहस को और बढ़ा दिया।
केसी वेणुगोपाल से भी मांगा गया फीडबैक
बैठक में संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की भूमिका और टिकट वितरण की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इससे पहले भी पार्टी स्तर पर DUSU में NSUI के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए रिपोर्ट मांगे जाने की खबरें सामने आई थीं।
पार्टी के भीतर अब यह चर्चा है कि DUSU जैसे बड़े छात्र चुनाव में संगठन की रणनीति और जमीनी नेटवर्क को कैसे मजबूत किया जाए। इसके साथ ही टिकट वितरण के दौरान स्थानीय समीकरणों और छात्र नेताओं की स्वीकार्यता को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। चारों केंद्रीय पदों पर एनएसयूआई के जीत से दूर रहने के बाद पार्टी में जवाबदेही तय करने और संगठनात्मक सुधार की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी कोई औपचारिक फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।
