नई दिल्ली: बंगाल के मुख्य कोच लक्ष्मी रतन शुक्ला को शेष भारत टीम का बल्लेबाजी कोच नियुक्त किया गया है जो एक से पांच अक्टूबर तक श्रीनगर में ईरानी कप मैच में जम्मू-कश्मीर से भिड़ेगी। शुक्ला पिछले कुछ सत्र से बंगाल के मुख्य कोच हैं और टीम रणजी ट्रॉफी के पिछले सत्र में सेमीफाइनल में जम्मू-कश्मीर से हार गई थी। बंगाल के 46 वर्षीय पूर्व कप्तान शुक्ला ने 1999 में भारत की ओर से तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। वह आईपीएल विजेता कोलकाता नाइट राइडर्स का भी हिस्सा रहे और खिलाड़ी के रूप में अपने अंतिम आईपीएल सत्र में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेले। शुक्ला भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ पहली बार कोई भूमिका निभा रहे हैं। देवाशीष मोहंती शेष भारत टीम के गेंदबाजी कोच जबकि मिलाप मेवादा क्षेत्ररक्षण कोच होंगे।
कैसे हुई ईरानी कप की शुरुआत?
भारतीय घरेलू क्रिकेट में ईरानी कप की शुरुआत वर्ष 1959-60 में रणजी ट्रॉफी चैंपियनशिप के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुई थी। इसका नाम जेडआर ईरानी के नाम पर रखा गया। वह साल 1928 में बीसीसीआई की स्थापना से लेकर 1970 में अपनी मृत्यु तक बोर्ड से जुड़े रहे। ईरानी कप का पहला मैच 1959 की रणजी चैंपियन बॉम्बे(अब मुंबई) और शेष भारत की टीम के बीच खेला गया था। इस मुकाबले में बॉम्बे चैंपियन बना था। यह मैच सेरेमोनियल था लेकिन साल 1962 में बीसीसीआई ने इसे घरेलू कैलेंडर का नियमित टूर्नामेंट बना दिया।
ईरानी कप के साथ होती है सीजन की शुरुआत
आमतौर पर इस टूर्नामेंट के साथ ही नए सीजन की शुरुआत होती है। पांच दिन के फॉर्मेट में इसे खेला जाता है। रेस्ट ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा 30 बार ईरानी कप अपने नाम करने में सफल रही। वहीं मुंबई की टीम 15 बार ईरानी कप अपने नाम करने में सफल रही है। इसके अलावा कर्नाटक(6 बार), विदर्भ (3 बार), दिल्ली (2 बार) और रेलवे (2 बार) ईरानी कप अपने नाम कर चुकी है। 1965-66 में बॉम्बे और शेष भारत की टीमें साझा विजेता बनी थीं। वहीं 1979 -80 में दिल्ली और शेष भारत की टीम को साझा विजेता घोषित किया गया था। पिछली बार रणजी चैंपियन विदर्भ ने ईरानी कप पर कब्जा किया था। अब पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम के पास इतिहास रचने का शानदार मौका है।
(भाषा इनपुट के साथ)
