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EXCLUSIVE: संघर्ष से ऐतिहासिक एशियन गेम्स पोल वॉल्ट मेडल तक... बारानिका एलंगोवन ने अविश्वसनीय सफर के बारे में बताया

स्पोर्ट्स नाउ से खास बातचीत में, बारानिका एलंगोवन ने पोल वॉल्ट में ऐतिहासिक एशियन गेम्स ब्रॉन्ज मेडल तक के अपने शानदार सफर के बारे में बताया।

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बारानिका एलंगोवन के साथ खास बातचीत। फोटो- PTI

करिश्मा सिंह, आइची नागोया। बारानिका एलंगोवन ने इतिहास रचा और रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। वह पोल वॉल्ट में एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। एलंगोवन ने एक रोमांचक फिनिश के बाद कजाकिस्तान की पोलिना इवानोवा के साथ ब्रॉन्ज मेडल शेयर किया। दोनों एथलीट ने 4.15m की दूरी तय की।

बता दें कि टाई होने पर सबसे कम फेल होने वाले एथलीट को विनर घोषित किया जाता है। दोनों ने टाई-ब्रेकर में न जाने का फैसला किया और मेडल शेयर किया। अपनी ऐतिहासिक कामयाबी के बाद, एलंगोवन ने स्पोर्ट्स नाउ से बात की और अपने संघर्ष की कहानी साझा की।

सवालः बारानिका, सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई। इतिहास रचते हुए कैसा लग रहा है?

जवाब: मैं सच में बहुत खुश हूं, खुश और उत्साहित हूं। अभी के लिए।

सवाल: क्या आप हमें अपने सफर के बारे में बता सकती हैं? आपने कहां से शुरुआत की और आप पोल वॉल्ट में इस मुकाम तक कैसे पहुंचीं जहां आपने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

जवाब: हां, पहले स्कूल के दिनों में मैं सिर्फ एथलेटिक्स खेलती थी, मल्टी-इवेंट्स। जैसे 100, 200 मीटर दौड़ना, लॉन्ग जंप और ट्रिपल जंप, सब कुछ। और कॉलेज में आने के बाद, मैं ट्रिपल-जंप की ट्रेनिंग करने की कोशिश कर रही थी, असल में मुझे ट्रिपल जंप बहुत पसंद था। मैं ट्रिपल-जंप करना चाहती थी। मैं एक कोच की तलाश में थी। लेकिन मेरे कॉलेज के फिजिकल डायरेक्टर ने मुझे बास्केटबॉल खेलने का सुझाव दिया।

तो शुरू के दो साल मैं सिर्फ बास्केटबॉल खेलती रही। उसके बाद, मैं रेगुलर ट्रिपल जंप के कोच के बारे में पूछा। तब मेरी फिजिकल डायरेक्टर ने कोच की जानकारी दी और उनसे मिलने का सुझाव दिया। मैं स्टेडियम गई पोल वॉल्ट कोच को मना करने के लिए। क्योंकि पोल वॉल्ट, कोई इंसान बिना बैलेंस के स्टिक के सहारे कैसे दौड़ सकता है और मैं बहुत सी बातें सोच रही थी। मैंने इस इवेंट को इतने करीब से कभी नहीं देखा था।

स्टेडियम जाने के बाद, मुझे और पता चला। मैंने बहुत करीब से देखा और उस समय एक सीनियर 5 मीटर क्रॉस कर रहा था और मैं उसकी जंप से सच में बहुत इम्प्रेस हुई। मैं बस पोल वॉल्ट इवेंट ट्राई करना चाहती थी। जब मैंने इसमें हिस्सा लिया, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे कोई इंटरनेशनल मेडल मिलेगा। कोई नेशनल मेडल मिलेगा, ऐसा कुछ नहीं। मैंने इसे मजे के लिए आजमाया। मेलबर्ग कोच से जुड़ने के बाद, उन्होंने मुझे एक रूटीन बनाने की सलाह दी।

सवालः हम खुश हैं कि आपने पोल वॉल्ट चुना, लेकिन आज जब आप खेल रही थी, जब आपको एहसास हुआ कि आपने मेडल जीत लिया है, तब कैसा एहसास था?

जवाब: दरअसल, पोल वॉल्ट एरिना में घुसने से पहले मेरे दिमाग में यही बात आई। बिना मेडल के, मुझे यह ग्राउंड नहीं छोड़ना चाहिए। मुझे अपना बेस्ट परफॉर्मेंस करना चाहिए। मैं बस यही सोच रही थी। लेकिन क्या हुआ, मुझे असल में पता नहीं था। मेरे एक को-एथलीट ने मुझसे कहा, तुमने ब्रॉन्ज जीता। मुझे सच में यकीन नहीं हुआ।

सवाल: आप यह मेडल किसे डेडिकेट करती हैं?

जवाब: यह मेडल, महिलाओं के पोल वॉल्ट में भारतीय इतिहास का पहला मेडल, एशियन गेम्स में मिला। मैं इसे अपने कोच को डेडिकेट करती हूं, जिन्होंने बहुत मेहनत की और असल में इसे देखना चाहते थे। वह मुझसे कहते थे कि यह वह पोटेंशियल नहीं है जो तुम इससे ज्यादा कर सकती हो, तुम मेंटली इतनी सारी चीजों के लिए तैयार नहीं हो और वह हर समय मेरे साथ थे। अच्छे-बुरे और हर चीज में मैं इसे मेलबर्ग को डेडिकेट करती हूं।

    Umesh Kumar
    उमेश कुमारauthor

    उमेश कुमार पत्रकारिता में पिछले 7 वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से करने के बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया में बतौर स्पोर्ट्स राइटर अपनी मजबूत पहचान बनाई। उमेश ने अमर उजाला (प्रिंट), ईटीवी भारत (हैदराबाद), दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों के साथ काम किया है। उमेश ने क्रिकेट की कई बायलेटरल सीरीज, आईपीएल, वर्ल्ड कप, प्रो कबड्डी लीग, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप और ओलंपिक जैसे बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। खेलों की गहरी समझ और डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग उनकी लेखनी की खासियत है।

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