नई दिल्ली: भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के रिकॉर्ड 10 पदकों के प्रदर्शन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि एशियाई खेलों में इस उपलब्धि को दोहराना आसान नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय मुक्केबाज वहां भी देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक जापान में होगा।
ग्लास्गो में भारत ने बॉक्सिंग में जीते 7 गोल्ड, 3 सिल्वर मेडल
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रिकॉर्ड सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक जीतकर इतिहास रचा। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में मुक्केबाजी में यह किसी भी देश का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। अजय सिंह ने रविवार को ग्लास्गो से आयोजित ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा,'पिछले दो दिन हमारे लिए असाधारण और ऐतिहासिक रहे। मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतना राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।पांच महिला मुक्केबाजों का स्वर्ण पदक जीतना इस सफलता को और भी खास बनाता है। हमें इस बात पर भी गर्व है कि भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से सात मुक्केबाजी से आए हैं।'
यह सफलता है भविष्य के लिए तैयारियों का हिस्सा
बीएफआई अध्यक्ष ने कहा कि यह सफलता भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी का भी हिस्सा है। उन्होंने कहा,'यह प्रदर्शन एशियाई खेलों और 2028 ओलंपिक की हमारी तैयारियों का भी संकेत है। आप जानते हैं कि विश्व मुक्केबाजी में भारत की रैंकिंग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भारत अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2016 में हम शीर्ष 40 में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।'
एशियाई खेलों में इस सफलता को दोहराना नहीं होगा आसान
अजय सिंह ने स्वीकार किया कि एशियाई खेलों की चुनौती कहीं अधिक कठिन होगी। उन्होंने कहा,'राष्ट्रमंडल खेलों जैसी सफलता को एशियाई खेलों में दोहराना काफी मुश्किल होगा। एशियाई खेल हमारे लिए लगभग ओलंपिक जैसी चुनौती हैं। दुनिया के शीर्ष मुक्केबाजी देशों में कजाखस्तान, उजबेकिस्तान और भारत शामिल हैं। इसके अलावा चीन के मुक्केबाज भी बेहद मजबूत हैं।' उन्होंने हालांकि विश्वास जताया कि भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी। ऐसा प्रदर्शन दोहराना आसान नहीं होगा, लेकिन हमें भरोसा है कि हमारी टीम अच्छा करेगी। एशियाई खेलों में यदि आप बड़ी संख्या में पदक जीतते हैं, तो ओलंपिक में भी पदक जीतने की संभावना बढ़ जाती है।'
राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मिला एशियाई खेलों का टिकट
बीएफआई अध्यक्ष ने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले सभी भारतीय मुक्केबाजों ने स्वतः एशियाई खेलों की टीम में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। उन्होंने कहा,'हमने पहले ही घोषणा कर दी थी कि राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले मुक्केबाज स्वतः एशियाई खेलों की टीम के लिए चुने जाएंगे।' उन्होंने कहा कि महासंघ खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है और 2028 तक की विस्तृत योजना तैयार की जा चुकी है। उन्होंने कहा,'हम इस वर्ष घरेलू स्तर पर लीग या पेशेवर मुक्केबाजी प्रारूप को फिर से शुरू करना चाहते हैं, ताकि खिलाड़ियों को अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले और अनुभव मिल सके।'
उन्होंने महासंघ के कामकाज पर कहा,'हमें समय-समय पर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, महासंघ यह सुनिश्चित करता है कि खिलाड़ी इन सबसे अलग रहकर केवल अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करें।'
