अध्यात्म

Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या पर क्या करें और क्या ना करें, जानिए सही नियम और परंपराएं

Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या के दिन दान, जप, ध्यान और सेवा कार्य करने से मानसिक शांति मिलती है। परंपराओं का पालन करना व्यक्ति की आस्था पर निर्भर करता है, लेकिन इस दिन सात्त्विक जीवनशैली अपनाना हमेशा लाभकारी माना जाता है।

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वैशाख अमावस्या पर क्या करें और क्या ना करें, जानिए सही नियम और परंपराएं

Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या के दिन लोग खास तौर पर अपने पितरों को याद करते हैं। यह दिन पितरों की शांति, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और धार्मिक कार्यों में भाग लेते हैं। आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें?

वैशाख अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान कर पितरों का तर्पण करने से उन्हें शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल, तिल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।

प्रातःकाल गंगा जल या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि यह संभव ना हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही, भजन-कीर्तन और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है।

वैशाख अमावस्या पर क्या नया काम कर सकते हैं?

परंपराओं के अनुसार अमावस्या को सामान्यतः नया और बड़ा शुभ कार्य शुरू करने के लिए बहुत शुभ दिन नहीं माना जाता। जैसे विवाह, गृह प्रवेश या बड़े निवेश जैसे कार्य इस दिन टाले जाते हैं। हालांकि, आध्यात्मिक कार्य, पूजा-पाठ, ध्यान, व्रत रखना या सेवा कार्य शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

वैशाख अमावस्या पर क्या नॉन-वेज खा सकते हैं?

इस खास दिन शरीर और मन को शुद्ध रखना होता है ताकि पूजा-पाठ और ध्यान में एकाग्रता बनी रहे। वैशाख अमावस्या जैसे पवित्र दिन पर सात्त्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। इस दिन तामसिक भोजन, मांसाहार और शराब से परहेज करना बेहतर माना जाता है।

वैशाख अमावस्या पर क्या नाखून और बाल काट सकते हैं?

इस दिन नाखून और बाल काटना वर्जित माना गया है। इसे अशुभ या ऊर्जा संतुलन के विपरीत माना जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह से धार्मिक आस्था पर आधारित है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई कठोर नियम नहीं है। फिर भी बहुत से लोग इस दिन इन कार्यों से बचते हैं।

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prabhat sharma
प्रभात शर्मा author

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–... और देखें

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