मुंबई: नई दिल्ली के जंतर-मंतर में चल रहे छात्र आंदोलन की आंच पूरे देश में फैल गई है। नीट परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक के अनशन के साथ आगे बढ़ा। लेकिन सोनम वांगचुक को अचानक भूख हड़ताल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आंदोलन उग्र हो गया। सीजेपी ने मानसून सत्र के पहले दिन संसद भवन तक मार्च करने का फैसला किया और बड़ी संख्या में इसमें शिरकत करने की अपील युवाओं से की। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे छात्रों के खिलाफ लाठी चार्ज किया और शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक होता दिखा। बावजूद इसके आंदोलन कर रहे छात्रों को देश भर से आम और खास लोगों का समर्थन मिल रहा है। भारत रत्न सचिन तेंदुलकर भी आंदोलनकारियों के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने एक संदेश आंदोलनकारियों और सरकार को दिया है।
सचिन तेंदुलकर ने अपने संदेश में पिता रमेश तेंदुलकर द्वारा बचपन में दी गई सीख का हवाला देते हुए कहा, मेरे पिता एक प्रोफेसर थे। वे कई युवा छात्रों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने बचपन से मुझे एक बात सिखाई थी,'असफल होना गलत नहीं है, लेकिन धोखा देना गलत है। कभी भी शॉर्टकट मत अपनाना।'समाज के वरिष्ठ नागरिक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी सही संस्कृति के निर्माण की है। यदि कोई समाज मेहनत से ज्यादा महत्व केवल परिणामों को देता है, तो वह योग्यता और ईमानदारी की बजाय शॉर्टकट अपनाने लगता है।
आज यदि कुछ छात्र यह महसूस कर रहे हैं कि उनकी मेहनत का उचित सम्मान नहीं हुआ, तो उनकी निराशा स्वाभाविक है। हम सभी को मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसा महसूस न करना पड़े। युवा भारत सपनों और ऊर्जा से लबरेज़ है। यही युवा हमारे देश की सफलता की सबसे बड़ी ताकत हैं। माता-पिता, शिक्षक, मित्र, रिश्तेदार, स्कूल और प्रशासन, हम सभी की बड़ी जिम्मेदारी है कि हम अपने युवाओं का उत्साह बनाए रखें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
हमें ऐसा समाज बनाना होगा, जहां मेहनत को सम्मान मिले, ईमानदारी को प्रोत्साहन मिले और योग्यता की जीत हो। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सभी मिलकर ऐसे समाधान खोजेंगे जो हमारे बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाएं और उनके सपनों तथा आकांक्षाओं की रक्षा करें।
जय हिंद
