Neem Karoli Baba Blanket Story: नीम करौली बाबा इन दिनों फिल्म 'हनुमान अंश' की वजह से फिर चर्चा में हैं। 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई यह फिल्म बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित है। फिल्म के निर्माताओं ने इसे बायोपिक नहीं बल्कि बाबा के जीवन से प्रेरित आध्यात्मिक कहानी बताया है। फिल्म की कहानी में बाबा की हनुमान भक्ति, सेवा और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को दिखाया गया है।
नीम करौली बाबा का नाम आते ही कैंची धाम, हनुमान जी और कंबल की तस्वीर सामने आती है। बाबा को अक्सर कंबल ओढ़े हुए देखा गया। आज भी कैंची धाम पहुंचने वाले भक्त बाबा की प्रतिमा पर कंबल चढ़ाते हैं। इस कंबल के पीछे बाबा के जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है।
नीम करौली बाबा को कंबल क्यों चढ़ाया जाता है
नीम करौली बाबा अपने जीवन में अक्सर कंबल ओढ़े रहते थे। राम दास की किताब 'Miracle of Love: Stories about Neem Karoli Baba' में बाबा के कंबल से जुड़े कई प्रसंग दर्ज हैं। किताब में बाबा को अक्सर कंबल में लिपटे हुए रहने का वर्णन मिलता है।
इसी कंबल की वजह से बाबा की पहचान भक्तों के बीच अलग बनी। कैंची धाम में बाबा की प्रतिमा भी कंबल ओढ़े हुए है। भक्त वहां कंबल लेकर पहुंचते हैं, बाबा को अर्पित करते हैं और उसे उनका आशीर्वाद स्वरूप रखते हैं। माना जाता है कि कंबल में बाबा की शक्ति थी और यह भक्तों को बीमारियों और बुरी शक्तियों से बचाता है। कथाओं के अनुसार बाबा का कंबल गंभीर से गंभीर बीमारियों से लोगों को मुक्ति दिलाता था, लेकिन बाबा के कंबल की सबसे चर्चित कहानी द्वितीय विश्व युद्ध के समय की बताई जाती है।
आधी रात दर्द से क्यों कराह रहे थे बाबा
कथा के अनुसार, एक बार नीम करौली बाबा एक बुजुर्ग दंपती के घर ठहरे थे। रात में बाबा चारपाई पर कंबल ओढ़कर सो गए। कुछ समय बाद बाबा तेज दर्द से कराहने लगे। उनकी हालत देखकर दंपती को लगा कि बाबा को बहुत तकलीफ हो रही है। रात किसी तरह बीती। सुबह बाबा ने अपना कंबल बुजुर्ग दंपती को दिया और उसे गंगा में प्रवाहित करने के लिए कहा। इसके साथ ही कंबल को खोलकर नहीं देखने की बात कही। दंपती ने बाबा के निर्देश के अनुसार कंबल को गंगा में प्रवाहित कर दिया।
उसी रात युद्ध में फंसा था दंपती का बेटा
इस कहानी का अगला हिस्सा और भी चौंकाने वाला है। कहानी के अनुसार, बुजुर्ग दंपती का बेटा सैनिक था। जिस रात बाबा घर में दर्द से कराह रहे थे, उसी रात उस सैनिक की टुकड़ी दुश्मनों से घिर गई थी। चारों तरफ से गोलियां चल रही थीं। सैनिक के कई साथी मारे गए, लेकिन वह खुद सुरक्षित बच गया। युद्ध से लौटने के बाद उसने परिवार को पूरी घटना बताई तब परिवार को पता चला कि बाबा जिस समय असहनीय दर्द से कराह रहे थे, उसी समय उनका बेटा गोलियों के बीच फंसा हुआ था। बाबा ने उस सैनिक का दर्द खुद सहा और उसको सुरक्षित बचा लिया। इसी वजह से बाबा के चमत्कारिक कंबल की कहानी और भी प्रसिद्ध हो गई।
कैंची धाम में आज भी चढ़ता है कंबल
नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम नीम करौली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम है। यहां हनुमान मंदिर के साथ बाबा की प्रतिमा भी स्थापित है। आधिकारिक कैंची मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है और मंदिर का प्रशासन ट्रस्ट के माध्यम से चलता है। धाम पहुंचने वाले भक्त बाबा की प्रतिमा पर कंबल चढ़ाते हैं। कंबल बाबा के पहनावे और उनसे जुड़ी घटनाओं का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि कैंची धाम की तस्वीरों और वीडियो में कंबल अर्पित करते भक्त अक्सर दिखाई देते हैं।
गर्मी और सर्दी में कंबल ओढ़ते थे बाबा
नीम करौली बाबा का जीवन बेहद सादा था। वे कम सामान रखते थे और साधारण तरीके से रहते थे। राम दास की पुस्तक में बाबा के जीवन से जुड़े प्रसंगों में उनका कंबल बार-बार सामने आता है। एक जगह तो बाबा को दिया गया नया कंबल भी उन्होंने अपने पास रखने के बजाय एक महिला भक्त को दे दिया। बाबा के लिए कंबल किसी दिखावे की वस्तु नहीं था। वह उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा था। समय के साथ यही कंबल उनके भक्तों के लिए बाबा की पहचान बन गया। माना जाता है कि बाबा का कंबल सर्दियों में गर्मी और गर्मी में ठंडक देने वाला था।
कंबल घर ले जाने की भी है परंपरा
कैंची धाम में भक्त बाबा की प्रतिमा को कंबल चढ़ाते हैं। कंबल को बाबा से स्पर्श कराने के बाद उसे घर ले जाने की परंपरा भी भक्तों में है। इसे घर में सुरक्षित रखा जाता है और बाबा का प्रसाद मानकर पूजा स्थल पर रखा जाता है। बीमार व्यक्ति के लिए बाबा से प्रार्थना करते समय भी भक्त कंबल का इस्तेमाल करते हैं। बाबा की कृपा से बीमारी और संकट दूर होने की प्रार्थना के साथ कंबल चढ़ाया जाता है। माना जाता है कि बाबा को कंबल अर्पित करने से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
'हनुमान अंश' के फिर चर्चा में आया कैंची धाम
'हनुमान अंश' मूवी ने नीम करौली बाबा के जीवन को नई पीढ़ी के सामने पहुंचाया है। फिल्म में बाबा की आध्यात्मिक यात्रा और हनुमान भक्ति को केंद्र में रखा गया है। फिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई थी और अब रिलीज के चौथे हफ्ते में भी बॉक्स ऑफिस पर चर्चा में है। 31 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार फिल्म का भारत में नेट कलेक्शन 40 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। फिल्म के आधिकारिक परिचय में बाबा की सबसे बड़ी सीख प्रेम, सेवा, भोजन और ईश्वर स्मरण को बताया गया है। कैंची धाम आज भी इसी संदेश से जुड़ा प्रमुख केंद्र है। इस फिल्म के बाद से कैंची धाम चर्चा में है।
