Shardiya Navratri 2025 Havan Mantra, Vidhi: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी के दिन महागौरी माता की अराधना की जाती है। नवरात्र की पूजा हवन के बिना अधूरी मानी जाती है। खासतौर से अष्टमी के मौके पर तो पूजा-पाठ के अलावा हवन करने का भी विधान है। अगर आप भी महाअष्टमी के दिन हवन करना चाहते हैं तो यहां से हवन के मंत्र और विधि देख सकते हैं।
इन 5 मंत्रों से 5 बार शुद्ध देसी घी की आहुति दें-
ॐ प्रजापतये स्वाहा।
ॐ इन्द्राय स्वाहा।
ॐ अग्नये स्वाहा।
ॐ सोमाय स्वाहा।
ॐ भूः स्वाहा।
यदि हवन 2 या 2 से अधिक लोग कर रहे हैं तो 1 सदस्य घी की आहुति दे, बाकी सदस्य हवन सामग्री से आहुति दें। ये मंत्र इस प्रकार है-
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
ऊँ चंद्रयसे स्वाहा
ऊं भौमाय नमः स्वाहा
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
ऊँ शनये नमः स्वाहा
ऊँ राहवे नमः स्वाहा
ऊँ केतवे नमः स्वाहा
अब 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करते हुए आहुति दें। गायत्री मंत्र इस प्रकार है-
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा (21 बार)
अब नीचे बताये गये इन मंत्रों से हवन में आहुति दें-
ॐ गणेशाय नम: स्वाहा।
ॐ गौरियाय नम: स्वाहा।
ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा।
ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा।
ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा।
ॐ हनुमते नम: स्वाहा।
ॐ भैरवाय नम: स्वाहा।
ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा।
ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा
ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा।
ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा।
ॐ शिवाय नम: स्वाहा।
अब 11 बार महामृत्युंजय मंत्र से आहुति दें-
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्/ उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा।”
आखिर में एक बार इस मंत्र से आहुति दें
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते। स्वाहा।
हवन विधि-
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर हवन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र पहनकर हवन की तैयारी करें। हवन कुंड को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। हवन में आम की लकड़ी, गुग्गुल, कपूर, घी, जौ, तिल, और हवन सामग्री रखें। देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र से आहुतियाँ दें। प्रत्येक आहुति के साथ “स्वाहा” बोलें। कम से कम 108 आहुतियां दें। दिए गए मंत्रों से आहुति दें। हवन के बाद देवी की आरती करें और कन्या पूजन करके उन्हें भोजन व उपहार दें। इससे मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
