Shab-e-Meraj 2026: शब-ए-मेराज की नमाज कैसे पढ़ें, क्या रहेगा शाम की नमाज का समय, जानें यहां
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 16, 2026, 02:20 PM IST
Shab-e-Meraj 2026: इस्लाम में शब-ए-मेराज को बेहद ही चमत्कारिक घटना माना जाता है। यह रजब माह की 27वीं रात होती है। इस रात को पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह का बिना किसी पर्दे के दीदार किया था। इसके साथ ही उन्होंने एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा की थी। साल 2026 में यह रात 16 जनवरी को है। इस रात को नमाज़ अदा की जाती है। आइए जानते हैं कि इस रात नमाज़ पढ़ने का क्या सलीका है।
शबे मेराज पर नमाज अदा करने का तरीका
Shab-e-Meraj 2026: शब-ए-मेराज बेहद ही पाक रात है। इस दिन इस्लाम के इतिहास में एक बेहद ही चमत्कारिक घटना घटी थी। यह रात रजब माह की 27वीं रात होती है। इस रात को नमाज़ अदा करना बेहद ही खास माना जाता है। इस रात की गई अल्लाह की इबादत और दुआ तुरंत कुबूल होती है। आइए जानते हैं कि शब-ए-मेराज पर नमाज कैसे पढ़ें और नमाज का समय क्या होगा?
शब-ए-मेराज क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
शब-ए-मेराज वह मुबारक रात है, जिसमें अल्लाह तआला ने अपने आखिरी नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को खास इज्जत और मकाम अता किया। इस रात नबी करीम को मस्जिद-ए-हरम (मक्का) से मस्जिद-ए-अक्सा और फिर आसमानों की सैर कराई गई। इस मुकद्दस सफर को मेराज कहा जाता है। शब-ए-मेराज की अहमियत इसलिए भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि इसी रात मुसलमानों पर पांच वक्त की नमाज फर्ज की गई। यह रात अल्लाह और उसके बंदों के रिश्ते की अहमियत को खास तौर पर बताती है।
शब-ए-मेराज की नमाज कैसे पढ़ें?
फेमस इस्लामिक स्कॉलर मौलाना कारी गोरा की मानें तो शब-ए-मेराज की कोई खास नमाज कुरआन या सही हदीस से साबित नहीं है। इसलिए इस रात कोई तयशुदा नमाज पढ़ना जरूरी नहीं है। मुसलमान इस रात आम नफ्ल नमाज पढ़ सकते हैं, कुरआन की तिलावत कर सकते हैं, दुआ और इस्तिगफार कर सकते हैं। इस रात की इबादत का मकसद अल्लाह से करीब होना और अपने गुनाहों की माफी मांगना होता है।
शब-ए-मेराज की शाम की नमाज का समय क्या रहेगा?
शब-ए-मेराज की शाम की नमाज का समय आम दिनों की तरह ही होता है। मग़रिब की नमाज सूरज डूबने के बाद अदा की जाती है। 16 जनवरी को फज्र की नमाज सुबह 5 बजकर 52 मिनट, सूर्योदय सुबह 7 बजकर 14 मिनट, जुहर की नमाज दोपहर 12 बजकर 30 मिनट और असर की नमाज दोपहर 3 बजकर 27 मिनट, जबकि मगरिब की नमाज शाम 5 बजकर 47 मिनट पर अदा की जाएगी। ईशा की नमाज शाम 7 बजकर 9 मिनट पर होगी। ये समय यूनिवर्सिटी ऑफ इस्लामिक साइंसेज, कराची के अनुसार है। आप अपने आसपास की मस्जिद से सटीक समय की जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा, रात में भी आप नमाज अदा कर सकते हैं।
शब-ए-मेराज की रात को क्या हुआ था?
फेमस इस्लामिक स्कॉलर मौलाना कारी गोरा बताते हैं कि इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, शब-ए-मेराज की रात इसरा और मेराज का वाकया पेश आया। सबसे पहले नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मस्जिद-ए-हरम से मस्जिद-ए-अक्सा तक रात के सफर पर ले जाया गया, जिसे इसरा कहा जाता है। इसके बाद मेराज हुआ, जिसमें नबी करीम को आसमानों की सैर कराई गई और कई नबियों से मुलाकात हुई। इसी दौरान अल्लाह तआला ने नमाज का हुक्म दिया, जो इस्लाम की सबसे अहम इबादत मानी जाती है।
शब-ए-मेराज की नमाज कितनी रकअत होती है?
इस्लामिक जानकार मुमताज़ अली क़ासमी के अनुसार शब-ए-मेराज की कोई तय रकअत वाली नमाज शरीअत से साबित नहीं है। कुछ जगहों पर 12, 20 या 100 रकअत की नमाजें पढ़ी जाती हैं, लेकिन इनके बारे में कोई पुख्ता और भरोसेमंद सबूत नहीं मिलता है। उलेमा के मुताबिक, ऐसी नमाजों को जरूरी या सुन्नत समझकर पढ़ना सही नहीं है। बेहतर है कि आम नफ्ल इबादत पर ही अमल किया जाए।
क्या शब-ए-मेराज के दिन रोजा रखा जाता है?
उलेमा के अनुसार, शब-ए-मेराज के दिन रोजा रखना न फर्ज है, न सुन्नत और न ही वाजिब है। हां, अगर कोई शख्स आम नफली रोजे की नियत से रोजा रखता है, तो यह जायज है, लेकिन इसे शब-ए-मेराज की खास सुन्नत या जरूरी अमल मानना सही नहीं माना जाता है।
शब-ए-मेराज की नफ्ल नमाज पढ़ने का तरीका
शब-ए-मेराज की नफ्ल नमाज आम नफ्ल नमाज की तरह ही पढ़ी जाती है। इसका तरीका इस प्रकार है।
- सबसे पहले अल्लाहु अकबर कहकर नमाज शुरू करें और हाथ बांध लें।
- इसके बाद सना पढ़ें।
- फिर अउजुबिल्लाहि मिनश शैतानिर्रजीम और बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ें।
- अब सूरह फातिहा पढ़ें।
- इसके बाद कुरान की कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं, जैसे कुलहुवल्लाहु अहद।
- फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएं और कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बियल अजीम पढ़ें।
- समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहते हुए खड़े हों और रब्बना लकल हम्द पढ़ें।
- इसके बाद सजदे में जाएं और कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बियल आला पढ़ें।
- दो सजदे पूरे करने के बाद पहली रकअत मुकम्मल होती है।
दूसरी रकअत भी इसी तरह पढ़ी जाती है। दूसरी रकअत के आखिर में अतहियात, दुरूद-ए-इब्राहिम और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दोनों तरफ सलाम फेर दिया जाता है।
नमाज के बाद क्या करें?
नफ्ल नमाज के बाद अल्लाह से दुआ मांगना, इस्तिगफार करना, दुरूद शरीफ पढ़ना और कुरान की तिलावत करना बेहतर माना जाता है। इस रात अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी और नेक रास्ते पर चलने की दुआ की जाती है।
शब-ए-मेराज से क्या सीख मिलती है?
शब-ए-मेराज यह पैगाम देती है कि नमाज अल्लाह और बंदे के बीच सबसे मजबूत रिश्ता है। यह रात सब्र, यकीन और इबादत की अहमियत को समझने का मौका देती है। इसी वजह से शब-ए-मेराज को इस्लाम में बेहद पाक और अहम रात माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गईं जानकारियां इस्लामिक जानकारों व पब्लिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।