Shab-e-Meraj 2026: हर मुसलमान का जाननी चाहिए शब-ए-मेराज से जुड़ी ये 6 अहम बातें, जानिए क्या हैं ये
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 16, 2026, 08:05 AM IST
Shab-e-Meraj 2026: शब-ए-मेराज इस्लाम की एक चमत्कारिक घटना है। यह रजब माह की 27वीं रात को मनाई जाती है। इसी रात को पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह की कृपा से एक अद्भुत की थी। इस रात की घटना को कुरान में अल-इसरा वल-मेराज कहा गया है। इससे जुड़ीं कुछ ऐसी बातें हैं, जो हर एक मुसलमान को जाननी चाहिए।
क्या है शब-ए-मेराज?
Shab-e-Meraj 2026: शब-ए-मेराज इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण और चमत्कारी घटनाओं में से एक है। यह रजब महीने की 27वीं रात को मनाई जाती है, जब पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अल्लाह की विशेष कृपा से एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा की। इस साल (2026) यह पावन रात 16 जनवरी को पड़ रही है। इस रात की घटना को कुरान में अल-इसरा वल-मेराज कहा गया है और यह हर मुसलमान के लिए ईमान, नमाज़ और अल्लाह से करीबी को बताती है।
क्या है शब-ए-मेराज?
पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को जिब्रील (अलैहिस्सलाम) बुराक नाम के एक सफेद, तेज़ रफ्तार जानवर पर सवार होकर मक्का से बैतुल मुकद्दस (मस्जिद-ए-अक्सा, यरुशलम) तक ले गए, इसे इसरा कहा जाता है। फिर वहीं से सातों आसमानों की यात्रा हुई, इसे मेराज कहा जाता है। इस दौरान पैगंबर ने विभिन्न पैगंबरों से मुलाकात की, जन्नत-जहन्नम के दृश्य देखे और अंत में सिद्ध मुकाम (सातवें आसमान से ऊपर) पर अल्लाह से सीधे बातचीत का सम्मान प्राप्त किया। यह किसी के लिए भी सबसे बड़ा सम्मान है।
हर मुसलमान को जाननी चाहिए शब-ए-मेराज से जुड़ीं ये 6 अहम बातें
इसी रात अल्लाह ने मुसलमानों पर पांच वक्त की नमाज़ फर्ज़ की। शुरू में 50 नमाज़ों का हुक्म था, लेकिन पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की दुआ और मूसा (अलैहिस्सलाम) की सलाह पर इसे 5 कर दिया गया, लेकिन सवाब 50 का मिलता है।
इस रात सूरह अल-बक़रा की अंतिम दो आयतें (आयत 285-286) नाज़िल हुईं, जो ईमान के बुनियादी सिद्धांत बताती हैं और हर मुसलमान के लिए रोज़ाना की दुआ का हिस्सा हैं।
पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए यह घटना 'आम-उल-हुज़न' (दुखों का साल) के बाद आई, जब ताइफ में उन्हें पत्थर मारे गए थे। अल्लाह ने इस यात्रा से उन्हें हिम्मत और सम्मान दिया।
पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अल्लाह से बिना किसी परदे के बात की। यह इस्लाम में सबसे बड़ी चमत्कारिक घटना है, जो अल्लाह और उसके बंदे के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाती है।
जब पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने यह घटना बताई तो काफिरों ने इसे झूठा कहा, लेकिन हजरत अबू बक्र (र.अ.) ने बिना किसी संदेह के यकीन किया और कहा, 'अगर पैगंबर कह रहे हैं तो सच है।' इसी कारण उन्हें सिद्दीक (सच्चाई पर यकीन करने वाला) का लकब मिला।
इस रात कुरान तिलावत, नमाज़, तस्बीह, दुआ और तौबा का बहुत सवाब है। पूरी रात जागकर इबादत करना मुसलमानों की पुरानी परंपरा रही है।
क्या इसे त्योहार की तरह मनाना चाहिए?
इस्लामिक स्कॉलर मानते हैं कि इस रात को विशेष त्योहार की तरह मनाना (जैसे खास रस्में या सवाब का यकीन) सुन्नत नहीं है। पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इसे कोई खास रिवायत नहीं बनाई, लेकिन रात में अल्लाह की इबादत और दुआएं करना हर मुसलमान के लिए नेकी का काम है। शब-ए-मेराज हमें सिखाती है कि अल्लाह की निकटता हर मुश्किल में मदद करती है, नमाज़ इस्लाम का सबसे मजबूत स्तंभ है, और पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की उच्च स्थिति हम सबके लिए प्रेरणा है। शब-ए-मेराज सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि अल्लाह की कृपा, नमाज़ की अहमियत और ईमान की मजबूती की याद दिलाने वाली रात है। इस रात अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सच्ची इबादत और नेक अमल की तौफीक दे।
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