अध्यात्म

Shab e Barat 2026: शब-ए-बारात 2026 में कब है, 3 या 4 फरवरी में से कब आएगी माफी की रात

Shab e Barat 2026 kab hai (Shab e Barat 2026 date in India calendar): शब-ए-बारात एक पाक और महत्वपूर्ण रात है जिसे मुसलमान माफी और रहमत की रात के नाम से जानते हैं। यह रात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान (Shaban) की 14वीं और 15वीं रात के बीच आती है। यहां देखें कि शब-ए-बारात 2026 में कब है। क्या है शब-ए-बारात 2026 की डेट।

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शब-ए-बारात 2026 में कब है (Pic: iStock)

Shab e Barat 2026 kab hai (Shab e Barat 2026 date in India calendar): शब-ए-बारात एक पाक और महत्वपूर्ण रात है जिसे मुसलमान माफी और रहमत की रात ( Night of Forgiveness या Mid-Shaban) के नाम से जानते हैं। यह रात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान (Shaban) की 14वीं और 15वीं रात के बीच आती है। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर शब-ए-बारात की तारीख हर साल अलग हो सकती है। यहां देखें कि शब-ए-बारात 2026 की डेट क्या है। शब-ए-बारात 2026 में कब है।

Shab-e-Barat 2026 कब है

शब-ए-बारात 2026 इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं (15 Shaban 1447 AH) रात को मनाई जाती है। भारत में शब-ए-बारात 2026 की तिथि 3 फरवरी 2026 (शाम से) से 4 फरवरी 2026 तक होने की संभावना है, लेकिन सटीक तारीख चांद नजर आने के बाद तय होती है। यह 15 शाबान 1447 हिजरी को मेल खाती है।

शब-ए-बारात क्या होती है

शब का अर्थ है रात और बरात का मतलब होता है बरी होना या निजात पाना — यानी अपनी गलतियों, गुनाहों और किस्मत की मांग के लिए एक खास रात। यह रूहानी रूप से अपने अतीत और भविष्य के बारे में दुआ मांगने, खुदा से माफी मांगने, और आध्यात्मिक रूप से आत्म-निरीक्षण करने की रात भी कही जाती है।

शब-ए-बारात क्यों मनाते हैं

शब-ए-बारात को गुनाहों की माफी की रात कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ कर देता है और उनकी दुआओं को सुनता है। कई मुसलमानों का विश्वास है कि इसी रात अल्लाह आगामी साल के लिए इंसानों की जिंदगी, मौत, rizq और तकदीर से जुड़े फैसले दर्ज करता है। इसीलिए लोग नमाज, दुआ और इबादत करते हैं। इसके अलावा, शब-ए-बारात को रमजान के आगमन से पहले आत्मिक रूप से खुद को तैयार करने का मौका भी माना जाता है। यह समय दिल से गलतियों को दूर करने, ताजा इरादों के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है।

शब-ए-बारात पर क्या करते हैं

इस रात मुसलमान मस्जिदों में और घरों में खास नमाज अदा करते हैं। कई लोग रात भर कुरान का पाठ करते हैं। खुदा को याद करते हुए अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस पवित्र रात को और भी खास बनाने के लिए कई लोग गरीबों और जरूरतमंदों को खाना, साफ कपड़े या दान (सदका) देते हैं। इससे दिल की नरमी और रहमत की अनुभूति होती है।

क्या शब-ए-बारात पर रोजा रखते हैं

शब-ए-बारात पर रोजा रखना वाजिब (obligatory) नहीं है, लेकिन संतों और विद्वानों के अनुसार नफल/सुनन रूप से रोजा रखा जा सकता है, खासकर शाबान के दिनों में। कुछ लोग शब-ए-बारात से पहले और उसके अगले दिन नफल रोजे भी रखते हैं।

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मेधा चावला
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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