Rang Panchami 2026 Puja Muhurat, Puja Samagri, Puja Vidhi, Aarti: रंग पंचमी पर्व के पीछे मान्यता है कि इस दिन देवलोक से सभी देवी-देवता पृथ्वी पर होली खेलने के लिए आते हैं। रंग पंचमी से जुड़ी मान्यता यह भी है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी के साथ होली खेली थी और इस होली में जहां देवी-देवताओं ने उन पर पुष्प की वर्षा की थी। राधा-कृष्ण की इस होली में उनके साथ ग्वाले और गोपियों ने भी रंगोत्सव मनाया था। कुछ इसी आस्था को लिए लोग इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा की विशेष रूप से पूजा करते हैं और देवी-देवताओं का ध्यान करते हुए हवा में अबीर और गुलाल फेंकते है। यहां से आप रंग पंचमी के शुभ मुहूर्त के बारे में जान सकते हैं। साथ ही यहां रंग पंचमी के पूजा की सामग्री लिस्ट, पूजा विधि मौजूद है। यहां रंग पंचमी के मंत्र और रंग पंचमी की आरती भी इस आर्टिकल में बताई गई है।
रंग पंचमी शुभ मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त- 05:16 AM से 06:06 AM तक
- अभिजित मुहूर्त- 12:09 से 12:56
- गोधूलि मुहूर्त- 18:23 से 18:47
- विजय मुहूर्त- 14:30 से 15:17
- सायाह्न सन्ध्या- 18:25 से 19:38
- अमृत काल- 30:25+ से मार्च 09 को 08:11 बजे
- प्रातः सन्ध्या- मार्च 07 को 29:25+ बजे से 06:39
रंग पंचमी पूजा सामग्री-
- राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर
- चौकी या बाजोट
- लाल या पीला कपड़ा
- तांबे का कलश
- गंगाजल
- पंचामृत
- चंदन
- कुमकुम
- अक्षत
- गुलाब के फूल
- अबीर, गुलाल
- घी का दीपक
- अगरबत्ती
- फल, खीर, मिठाई, गुड़-चना
- फूल माला
- आरती की थाली
- तांबे का लोटा
रंग पंचमी पूजा विधि-
रंग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के मंदिर की सफाई करें। पूजा स्थल पर उत्तर दिशा में एक चौकी बिछाएं और उस पर लाल या पीले कपड़े से आच्छादित करें। चौकी पर भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। प्रतिमा के समीप तांबे का कलश जल से भरकर रखें। सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें और संकल्प लें- ॐ विष्णवे नमः, आज चैत्र कृष्ण पंचमी तिथि पर मैं रंग पंचमी का पूजन और व्रत कर रहा हूं। अब राधा-कृष्ण को गंगाजल से स्नान कराएं। फिर पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद चंदन का तिलक लगाएं, कुमकुम अर्पित करें, अक्षत चढ़ाएं और गुलाब की माला पहनाएं। सभी देवी-देवताओं को अबीर-गुलाल अर्पित करें। भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी, माता लक्ष्मी, नारायण और अन्य देवताओं पर रंग चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। अब भोग लगाएं- खीर, पंचामृत, फल, गुड़-चना और मिठाई अर्पित करें। श्रद्धापूर्वक राधा-कृष्ण की आरती करें। आरती के बाद आसन पर बैठकर निम्न मंत्रों का जप करें। जप कम से कम 108 बार या 11 माला तक करें। पूजा समाप्ति पर क्षमा प्रार्थना करें।
रंग पंचमी मंत्र-
- श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय नमः
- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते राधाप्रियाय राधारमणाय गोपीजनवल्लभाय ममाभीष्टं पूरय पूरय हुं फट् स्वाहा।
- ॐ कृष्णाय वद्महे दामोदराय धीमहि तन्नः कृष्ण प्रचोदयात्
- देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते! देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः
- ॐ वृषभानुज्यै विधमहे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्
रंग पंचमी आरती-
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।
प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।
देखि छवि बलिहारी जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी।
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
दास अनाथ के नाथ आप हो।
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ हो।
हरि चरणों में शीश नवाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
श्री हरि दास के प्यारे तुम हो।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ।
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।
श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।
श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥
