Ram Navami 2023 Lord Shri Rama Dohe: कल यानी गुरुवार को राम नवमी (Ram Navami 2023) का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2023) की नवमी को राम नवमी (Ram Navami) के नाम से भी जाना जाता है। राम नवमी और चैत्र नवरात्रि का 9वां दिन एक ही दिन होता है। नवरात्रि (Navratri) के 9वें दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप और भगवान श्रीराम (Lord Shri Rama) की पूजा भी की जाती है। साथ ही इस दिन कन्या पूजन और हवन भी किया जाता है। राम नवमी के मौके पर देशभर के समस्त राम मंदिरों में प्रभु श्रीराम की पूजा अर्चना की जाती है। राम नवमी को लेकर आज हम भगवान श्रीराम पर कुछ दोहे शेयर कर रहे हैं, जिन्हें आपको भी राम नवमी के दिन पढ़ सकते हैं और साथ ही अपने करीबियों के साथ शेयर कर सकते हैं।
भगवान राम पर दोहे (Ram Ji Ke Dohe)
-नाम राम को अंक है सब साधन हैं सून।
अंक गएँ कछु हाथ नहिं अंक रहें दस गून॥
-नाम राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।
जो सुमिरत भयो माँग तें तुलसी तुलसीदासु॥
-राम नाम जपि जीहँ जन भए सुकृत सुखसालि।
तुलसी इहाँ जो आलसी गयो आज की कालि॥
-राम नाम सुमिरत सुजस भाजन भए कुजाति।
कुतरुक सुरपुर राजमग लहत भुवन बिख्याति॥
-मोर मोर सब कहँ कहसि तू को कहु निज नाम।
कै चुप साधहि सुनि समुझि कै तुलसी जपु राम॥
-राम नाम अवलंब बिनु परमारथ की आस।
बरषत बारिद बूँद गहि चाहत चढ़न अकास॥
-बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु।
होहि राम को नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु॥
-राम नाम नर केसरी कनककसिपु कलिकाल।
जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल॥
-राम नाम कलि कामतरु सकल सुमंगल कंद।
सुमिरत करतल सिद्धि सब पग पग परमानंद॥
-सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।
नाम सुप्रेम पियूष हृद तिन्हुहुँ किए मन मीन॥
-सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।
नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ॥
-लंक बिभीषन राज कपि पति मारुति खग मीच।
लही राम सों नाम रति चाहत तुलसी नीच॥
-जल थल नभ गति अमित अति अग जग जीव अनेक।
तुलसी तो से दीन कहँ राम नाम गति एक॥
-राम भरोसो राम बल राम नाम बिस्वास।
सुमिरत सुभ मंगल कुसल माँगत तुलसीदास॥
-राम नाम रति राम गति राम नाम बिस्वास।
सुमिरत सुभ मंगल कुसल दुहुँ दिसि तुलसीदास॥
-रामहि सुमिरत रन भिरत देत परत गुरु पायँ।
तुलसी जिन्हहि न पुलक तनु ते जग जीवत जायँ॥
-हृदय सो कुलिस समान जो न द्रवइ हरिगुन सुनत।
कर न राम गुन गान जीह सो दादुर जीह सम॥
-रहैं न जल भरि पूरि राम सुजस सुनि रावरो।
तिन आँखिन में धूरि भरि भरि मूठी मेलिये॥
-रे मन सब सों निरस ह्वै सरस राम सों होहि।
भलो सिखावत देत है निसि दिन तुलसी तोहि॥
-स्वारथ सीता राम सों परमारथ सिय राम।
तुलसी तेरो दूसरे द्वार कहा कहु काम॥
-तुलसी स्वारथ राम हित परमारथ रघुबीर।
सेवक जाके लखन से पवनपूत रनधीर॥
-आपु आपने तें अधिक जेहि प्रिय सीताराम।
तेहि के पग की पानहीं तुलसी तनु को चाम॥
