अध्यात्म

Ram Ji Ki Stuti: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं...प्रतिष्ठा द्वादशी पर श्री राम की इस स्तुति का जरूर करें पाठ

Ram Ji Ki Stuti: राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की पहली सालगिरह पर भगवान राम की इस स्तुति का जरूर करें पाठ, हर कामना होगी पूरी, मिलेगा भरपूर आशीर्वाद।

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Ram Ji Ki Stuti

Ram Ji Ki Stuti: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन...श्री राम की सबसे पॉपुलर स्तुति मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम की इस स्तुति का पाठ करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अगर संभव हो तो इस स्तुति का रोजाना पाठ करें। आज 11 जनवरी 2025 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ मनाई जा रही है तो ऐसे में इस शुभ दिन पर इस स्तुति का पाठ करने से आपको श्री राम भगवान की असीम कृपा प्राप्त होगी।

Ram Ji Ki Stuti (श्री राम स्तुति)

॥दोहा॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन

हरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुख

कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि

नव नील नीरद सुन्दरं ।

पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि

नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव

दैत्य वंश निकन्दनं ।

रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल

चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक

चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।

आजानु भुज शर चाप धर

संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर

शेष मुनि मन रंजनं ।

मम् हृदय कंज निवास कुरु

कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो

वर सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शील

स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय

सहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि

मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

॥सोरठा॥

जानी गौरी अनुकूल सिय

हिय हरषु न जाइ कहि ।

मंजुल मंगल मूल वाम

अङ्ग फरकन लगे।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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