अध्यात्म

Ram Navami 2023 Bhajan: भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,कौसल्या हितकारी...राम नवमी का पर्व बिना इन भजनों के है अधूरा

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 30, 2023, 12:07 PM IST

Ram Ji Ke Bhajan On Ram Navami 2023 (भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,कौसल्या हितकारी): राम नवमी के अवसर पर भगवान राम के भजनों को खूब सुना जाता है। यहां आप देखेंगे श्रीराम के दिल छू लेने वाले भजन।

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राम जी के भजन

Ram Navami 2023 Bhajan: राम नवमी का त्योहार देश भर में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम के बालरूप की पूजा की जाती है। इस खास मौके पर राम जी के मंदिरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। इस दिन रामलला का खास श्रृंगार किया जाता है और उनकी प्रतिमा को झूला झुलाया जाता है। साथ ही इस मौके पर राम जी के भजनों को भी खूब सुना जाता है।

यहां आप जानेंगे राम जी के एक से बढ़कर एक भजन जो आपको भक्ति के रस से सराबोर कर देंगे। साथ ही आपके अंदर एक अलग ही उत्साह और जोश भर देंगे। राम नवमी के मौके पर श्रीराम भगवान के इन भजनों को सबसे ज्यादा सुना जाता है।

राम जी के भजन (Ram Ji Ke Bhajan)

सजा दो घर को गुलशन सा, अवध में राम आये हैं

मेरे सरकार आये हैं, अवध में राम आये हैं...

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं ।

नव कंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणं...

हो.. मगंल भवन अमंगल हारी, द्रबहु सु दशरथ अचर बिहारी

राम सिया राम सिया राम जय जय राम, राम सिया राम सिया राम जय जय राम...

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।

हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी...

रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम ॥

सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालग्राम...

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला - भजन (Bhaye Pragat Kripala Din Dayala)

छंद:

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,

कौसल्या हितकारी ।

हरषित महतारी, मुनि मन हारी,

अद्भुत रूप बिचारी ॥

लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,

निज आयुध भुजचारी ।

भूषन बनमाला, नयन बिसाला,

सोभासिंधु खरारी ॥

कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,

केहि बिधि करूं अनंता ।

माया गुन ग्यानातीत अमाना,

वेद पुरान भनंता ॥

करुना सुख सागर, सब गुन आगर,

जेहि गावहिं श्रुति संता ।

सो मम हित लागी, जन अनुरागी,

भयउ प्रगट श्रीकंता ॥

ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,

रोम रोम प्रति बेद कहै ।

मम उर सो बासी, यह उपहासी,

सुनत धीर मति थिर न रहै ॥

उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,

चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।

कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,

जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥

माता पुनि बोली, सो मति डोली,

तजहु तात यह रूपा ।

कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,

यह सुख परम अनूपा ॥

सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,

होइ बालक सुरभूपा ।

यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,

ते न परहिं भवकूपा ॥

दोहा:

बिप्र धेनु सुर संत हित,

लीन्ह मनुज अवतार ।

निज इच्छा निर्मित तनु,

माया गुन गो पार ॥

- तुलसीदास रचित, रामचरित मानस, बालकाण्ड-192

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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